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भयावह : महाराष्ट्र-मप्र में ऑक्सीजन की भारी कमी, कुल 12 मरीजों की मौत
Wed, 14 Apr 2021 05:42 AM IST
Jeet Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई/भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई/भोपाल
Published by: Jeet Kumar
Updated Wed, 14 Apr 2021 05:42 AM IST
सार
- ऑक्सीजन और रेमेडेसविर इंजेक्शन की कमी बनी आफत
- 7000 कोरोना संक्रमित सक्रिय मरीज हैं जिनमें से 3000 मरीजों को ऑक्सीजन की सख्त जरूरत है
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : iStock
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विस्तार
कोरोना महामारी के बीच अस्पतालों में ऑक्सीजन का संकट मरीजों की सांस पर कहर बनकर टूटने लगा है। भोपाल के एमपी नगर के सिटी अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी के चलते पांच लोगों ने दम तोड़ दिया। वहीं मुंबई के वसई में सात लोगों की जान चली गई।
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भोपाल में अस्पतालों में भगदड़ की स्थिति है। अस्पताल संचालक अचानक मरीजों के तीमारदारों को बता रहे हैं कि अस्पताल में ऑक्सीजन नहीं है। मरीजों को किसी दूसरे अस्पताल लेकर जाओ, नहीं तो मौत भी हो सकती है। उधर, वसई-विरार में स्थित विकट है। यहां 7000 कोरोना संक्रमित मरीज हैं जिनमें 3000 मरीजों को ऑक्सीजन की सख्त जरूरत है।
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महाराष्ट्र में कोरोना का भयानक स्वरूप दिखाई देने लगा है। मुंबई से सटे पालघर जिले के वसई में ऑक्सीजन की कमी के कारण पिछले दो दिनों में कम से कम 10 मरीजों की मौत हो गई। वसई-विरार महानगरपालिका और वसई तहसील के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में ऑक्सीजन के साथ ही रेमेडिसविर इंजेक्शनों की कमी आफत बन गई है और इलाज के अभाव में लोग दम तोड़ रहे हैं।
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मुंबई-अहमदाबाद हाईवे पर स्थित वसई-विरार शहर में सप्ताहांत से ही ऑक्सीजन की आपूर्ति प्रभावित है। लेकिन सोमवार और मंगलवार को स्थिति विकट हो गई। यहां 7000 कोरोना संक्रमित सक्रिय मरीज हैं जिनमें से 3000 मरीजों को ऑक्सीजन की सख्त जरूरत है।
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पिछले दो दिनों में कोरोना के 10 मरीजों की मौत हो चुकी है। इनमें विनायका अस्पताल में सात मरीजों के अलावा नालासोपारा स्थित रिद्धि विनायक अस्पताल के तीन मरीज शामिल हैं।
हालांकि वसई-विरार महानगरपालिका ने ऑक्सीजन की कमी से मरीजों की मौत होने से इनकार किया है। लेकिन मरीजों के परिजनों का कहना है कि ऑक्सीजन की कमी के कारण मरीजों का इलाज नहीं हो पा रहा है। लोग दम तोड़ रहे हैं। मरीजों की मौत से परिजन उग्र हो गए जिससे तनाव की स्थिति बन गई। तुलिंज पुलिस ने किसी तरह स्थिति को संभाला।
वहीं, स्वास्थ्य विभाग ने बयान जारी कर कहा है कि विनायक अस्पताल में 7,000 लीटर ऑक्सीजन के साथ 139 जंबो सिलिंडर खरीदे गए थे।
इसी तरह, रिद्धिविनायक अस्पताल के लिए रविवार-सोमवार को 110 जंबो सिलेंडर की खरीद की गई थी। इन दोनों अस्पतालों में सभी रोगियों के लिए पर्याप्त मात्रा में चिकित्सा ऑक्सीजन का स्टॉक था। विनायक अस्पताल के चिकित्सा निदेशक डॉ. रणजीत उपाध्याय ने कहा कि मरीज गंभीर हालत में थे। उनके फेफड़े बुरी तरह प्रभावित थे। जिन मरीजों की मौत हुई उनमें से कुछ की हालत गंभीर थी।
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ऑक्सीजन के मुद्दे पर गौर करें प्रधानमंत्री -विधायक
वसई-विरार महानगरपालिका में बहुजन विकास आघाड़ी (बीवीए) की सत्ता है। बीवीए के अध्यक्ष हितेंद्र ठाकुर वसई से और उनके पुत्र विधायक क्षितिज ठाकुर नालासोपारा से विधायक हैं। जूनियर ठाकुर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की है कि वे मेडिकल ऑक्सीजन की कमी के मुद्दे पर गौर करें।
उन्होंने कहा कि वसई तालुका में ऑक्सीजन की भारी कमी है, जो आपूर्ति हो रही है वह केवल तीन घंटे तक चल सकती है। दुर्भाग्य से हमारे क्षेत्र में ऑक्सीजन की आपूर्ति नहीं होने के कारण तीन लोगों की जान जा चुकी है। उन्होंने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, उप मुख्यमंत्री अजीत पवार और सार्वजनिक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री से भी मदद की गुहार लगाई है।
मुंबई के बड़े निजी अस्पतालों के बिस्तरों पर सेलिब्रिटीज का कब्जा
महाराष्ट्र के एक मंत्री ने अजीबोगरीब बयान देकर बॉलीवुड सेलिब्रिटीज और क्रिकेट खिलाड़ियों पर निशाना साधा है। मुंबई के प्रभारी मंत्री असलम शेख ने मंगलवार को आरोप लगाया कि कुछ सेलिब्रिटी लोग और क्रिकेट खिलाड़ी कथित तौर पर कोरोना वायरस संक्रमण के गंभीर लक्षण नहीं होने के बावजूद बड़े अस्पतालों में भर्ती हो गए हैं जिसके कारण बड़े अस्पतालों में बिस्तर भरे हुए हैं।
राज्य के कपड़ा मंत्री शेख ने कहा कि यदि ये लोग अस्पतालों में भर्ती होने से बचते तो राज्य में कोरोना वायरस से पीड़ित जरूरतमंद मरीजों को भर्ती किया जा सकता था। कोरोना वायरस के मामले बढ़ने के साथ ही महाराष्ट्र सरकार बेड क्षमता बढ़ाने के लिए काम कर रही है।
अगले पांच से छह हफ्ते में मुंबई में मैदानों में तीन विशालकाय कोरोना केयर सेंटर अस्पताल बनाए जाएंगे। मुंबई में कोरोना वायरस के कुल 5,27,119 मामले हैं। यहां अब तक 12,060 संक्रमितों की मौत हो चुकी है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक मुंबई में 90,267 सक्रिय मरीज हैं जिनका इलाज चल रहा है।