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घर वापसी: सात भारतीय नाविकों को वापस यमन से दिल्ली लाया गया, हूती विद्रोहियों ने बना लिया था बंदी

Tue, 26 Apr 2022 04:12 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Tue, 26 Apr 2022 04:12 PM IST
सार

लखनऊ के नाविक मोहम्मद जशीम खान ने बताया कि यमन में स्थिति गंभीर है। विद्रोही हमारे जहाज और उसके माल पर कब्जा करना चाहते थे, हमें भी बंदी बना लिया गया क्योंकि हम जहाज पर चालक दल थे। जब उन्हें पता चला कि हम भारतीय हैं तो उन्होंने हमारे साथ अच्छा व्यवहार किया।

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Seven Indian sailors held captive by Houthi rebels in Yemen were brought back to Delhi as they were rescued by the Government of India with assistance from Oman Government
Sailor - फोटो : ANI

विस्तार

मोदी सरकार के कूटनीतिक प्रयासों से करीब साढ़े तीन महीने पूर्व यमन में हूती विद्रोहियों द्वारा बंदी बनाए गए सात भारतीय मस्कट से दिल्ली पहुंचे। इन्हें रविवार को ओमान की सहायता से हूती विद्रोहियों के नियंत्रण से मुक्त कराया गया। दिल्ली पहुंचने के बाद सभी ने प्रधानमंत्री का आभार जताया।

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ये सभी संयुक्त अरब अमीरात के व्यापारिक पोत रवाबी के चालक दल के सस्य हैं, जिसे कब्जा कर हूती विद्रोहियों ने सभी को बंदी बना लिया था। ये सभी उस 14 नाविक दल से जुड़े हैं, जिनमें ब्रिटेन के तीन और इंडोनेशिया, फिलीपीन, म्यांमार, इथियोपिया के एक-एक नाविक शामिल थे। भारत सरकार के कूटनीतिक प्रयासों के कारण ही सात भारतीय सहित सभी 14 सदस्यों की सुरक्षित रिहाई का रास्ता साफ हुआ।
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आज यदि जिंदा अपने देश में हैं तो पीएम मोदी के कारण : मुनव्वर
स्वदेश लौटे चालक दल के सभी सात सदस्यों ने प्रधानमंत्री मोदी की जमकर तारीफ की। इनमें से एक मोहम्मद मुनव्वर समीर शेख ने कहा कि अगर आज हम जिंदा हैं और अपने वतन में हैं तो प्रधानमंत्री के कारण है। प्रधानमंत्री की पहल और भारतीय दूतावास की विद्रोहियों से कड़ी बातचीत ने हमारी रिहाई का रास्ता साफ कराया। उत्तर प्रदेश के मोहम्मद जशीम खान ने कहा कि विद्रोहियों को जब पता चला कि हम भारतीय हैं तो उनके व्यवहार में बड़ा बदलाव आया। पहचान उजागर होने के बाद विद्रोहियों ने उन्हें अपने परिजनों और दूतावास से बातचीत करने की अनुमति दी और अच्छा व्यवहार किया। 
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संयुक्त राष्ट्र व विद्रोहियों के संपर्क में रहा भारत 
विद्रोहियों द्वारा बंदी बनाए जाने के बाद भारत ने लगातार कूटनीतिक प्रयास किया। इस मामले को संयुक्त राष्ट्र में उठाने के साथ ओमान के जरिये हूती विद्रोहियों से लगातार संपर्क साधा। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत सरकार इस दौरान अपने नागरिकों की सुरक्षा और सुरक्षित वापसी के लिए कई चैनलों के जरिये विद्रोहियों के संपर्क में थी।

 

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