केंद्रीय सुरक्षा बलों के 10 लाख जवान एक साल में 100 दिन परिवार संग रह सकें...बन रहा खाका
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केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के लगभग 10 लाख जवान एक साल में सौ दिन अपने परिवार संग रह सकें, इस योजना को जल्द से जल्द लागू करने के लिए काम शुरू हो गया है। विभिन्न बलों के सेवा नियमों में कई अहम बदलाव किए जा रहे हैं। यह भी संभव है कि विभिन्न अर्धसैनिक बलों के लिए नई तबादला नीति बना दी जाए। दूसरा, अधिक से अधिक जवानों को उनके घर के आसपास पोस्टिंग मिले, इस बाबत भी एक प्रपोजल तैयार हो रहा है। तीसरा, अर्धसैनिक बलों की तैनाती वाले ऐसे स्थान, जो कि शांति क्षेत्र में आते हैं, वहां फैमिली क्वार्टरों की संख्या बढ़ा दी जाए। इन सबके अलावा जवानों के काम करने के दिनों में भी बदलाव किया जाएगा। हो सकता है कि ग्रुप सेंटर और बटालियन में तैनात जवानों को सप्ताह में छह की बजाए पांच दिन ड्यूटी देनी पड़े।
छुट्टी मंजूर न होना, जवानों के गुस्से का बड़ा कारण
केंद्रीय गृह मंत्रालय इस योजना को बिना किसी देरी के लागू करना चाहता है। अर्धसैनिक बलों को लेकर मंत्रालय ने समय समय पर कई तरह के सर्वे कराए हैं। जवानों को गुस्सा क्यों आता है और वे कई बार आत्महत्या जैसा कदम उठा लेते हैं। ऐसे भी कई मामले सामने आए हैं कि जिनमें किसी जूनियर ने अपने सीनियर को गोली मार दी। बाद में जांच के दौरान पता चलता है कि जवान छुट्टी जाना चाहता था, लेकिन उसे छुट्टी नहीं मिली। उसने अपने अधिकारी से कई बार आग्रह किया कि उसे जरूरी काम है, इसलिए अवकाश मंजूर किया जाए। जब ऐसा नहीं हो पाता तो गुस्से में कोई अनहोनी हो जाती है।
ऐसी घटनाओं को लेकर जब अलग अलग अर्धसैनिक बलों में काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू की गई तो उसमें भी 'छुट्टी' एक बड़े तथ्य के रूप में उभर कर सामने आई। यह भी पता चला है कि जवान जब लंबे समय तक परिवार से दूर रहते हैं तो उनमें गुस्से जैसे लक्षण उभरने लगते हैं। इन सब बातों के मद्देनजर यह तय किया गया कि सभी अर्धसैनिक बलों सीआरपीएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी, एसएसबी, सीआईएसएफ और असम राइफल में एक ऐसी नीति बनाई जाए, जिससे कि हर जवान को एक साल में कम से कम सौ दिन अपने परिवार के साथ रहने का अवसर मिल सके।
डिजिटल सॉफ्टवेयर सुलझाएगा छुट्टी का पेच
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने गत सप्ताह सीआरपीएफ के एडीजी अतुल करवाल की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित की थी। इस कमेटी को चार सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट देनी है। कमेटी में बतौर सदस्य अरविंद कुमार एडीजी आईटीबीपी, आर.मलार विजही, आईजी बीएसएफ, भानू उपाध्याय आईजी एसएसबी, प्रतीक मोहन्ते डीआईजी सीआईएसएफ, विजय कुमार डीआईजी सीआरपीएफ और असम राइफल से भी एक प्रतिनिधि शामिल है। इस बाबत जब कमेटी के एक सदस्य से बात की गई तो उन्होंने कहा, इस पर काम शुरू हो गया है। सभी जवानों का उनकी पोस्टिंग और मूल आवास के हिसाब से डिजिटल रिकार्ड तैयार किया जा रहा है। यह रिकार्ड ग्रुप सेंटर, बटालियन, डीआईजी, आईजी जोन और डायरेक्टरेट स्तर पर बन रहा है।
मौजूदा नियमों के तहत ग्रुप सेंटर और बटालियन पर तैनात जवानों को सप्ताह में छह दिन ड्यूटी देनी पड़ती है, जबकि बाकी जगहों पर उनके लिए पांच कार्यदिवस का सप्ताह रहता है। फ़िलहाल सभी जवानों को एक साल में साठ दिन की ईएल यानी अर्जित अवकाश और 15 दिन की सीएल कैजुएल लीव मिलती है। ये व्यवस्था केवल ग्रुप सेंटर और बटालियन में रहने वाले जवानों के लिए है। जिन जवानों को सप्ताह में पांच दिन काम करना पड़ता है, उन्हें 30 ईएल मिल रही हैं। ऐसे में उनकी सीएल भी घट जाती हैं। अधिकारी का कहना है कि जो नई पॉलिसी बन रही है, उसमें यह ध्यान रखा जा रहा है कि जवानों को उनके घर के आसपास पोस्टिंग मिल जाए। दूसरा, तबादला नीति पूरी तरह लिबरल बना दी जाए। तीसरा, फेमिली क्वार्टरों की संख्या बढ़ाई जाए। सभी बलों का प्रयास रहेगा कि उनके जवान एक साल में चार अंतराल के तहत यानी 25-25 दिन का अवकाश ले सकें। जिन इलाकों में कोई जोखिम नहीं है और वहां फैमिली क्वार्टर हैं तो जवान अपने परिवार को वहां बुला सकता है। संभवतया नए साल से यह व्यवस्था लागू कर दी जाएगी।