'यह एहसान नहीं कर्तव्य': RSS प्रमुख मोहन भागवत बोले- स्वार्थ, डर या दिखावे से की गई सेवा नहीं होती टिकाऊ
सेवा को लेकर नई सोच रखते हुए आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि सेवा किसी पर किया गया एहसान नहीं, बल्कि हर व्यक्ति का कर्तव्य है। उन्होंने निस्वार्थ भाव से सेवा करने पर जोर देते हुए स्वार्थ और दिखावे वाली सेवा पर सवाल उठाए।
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स्वार्थ और दिखावे की सेवा टिकाऊ नहीं
आरएसएस प्रमुख भागवत ने कहा कि कई बार बड़ी संख्या में लोग सेवा कार्यों में जुटते नजर आते हैं, लेकिन यह हमेशा निस्वार्थ भाव से नहीं होता। उन्होंने इशारों में कहा कि चुनाव के समय ऐसे दृश्य ज्यादा देखने को मिलते हैं, लेकिन बाद में वही लोग नजर नहीं आते। उनके अनुसार, अगर सेवा के पीछे स्वार्थ छिपा हो, तो वह लंबे समय तक नहीं चलती। जैसे ही व्यक्ति का उद्देश्य पूरा होता है, वह सेवा कार्य छोड़ देता है।
Nagpur | RSS Chief Mohan Bhagwat says, "We have a different concept of the word 'service." Service isn't a favour; it's a duty. When we serve, we purify ourselves, as the human mind is naturally filled with various vices, both good and bad. Service purifies the mind, as it… pic.twitter.com/cK55tDiJyp
— ANI (@ANI) March 22, 2026
आरएसएस प्रमुख ने यह भी कहा कि कई बार लोग डर या मजबूरी में भी सेवा करते हैं, लेकिन ऐसी सेवा का प्रभाव सीमित होता है। सच्ची सेवा वही है, जो बिना किसी लालच, भय या दबाव के की जाए।
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