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सीरम ने चेन्नई के प्रतिभागी के साइड-इफेक्ट के दावे को नकारा, 100 करोड़ के मानहानि केस की दी चेतावनी
Mon, 30 Nov 2020 10:25 AM IST
अनवर अंसारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अनवर अंसारी
Updated Mon, 30 Nov 2020 10:25 AM IST
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कोरोना वैक्सीन टीके का परीक्षण
- फोटो : iStock
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सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (सीआईआई) ने रविवार को कोविड वैक्सीन परीक्षण में शामिल एक प्रतिभागी को लेकर एक बयान जारी किया। इसमें कहा गया कि वैक्सीन परीक्षण और प्रतिभागी की चिकित्सा स्थिति का कोई संबंध नहीं है। दरअसल, परीक्षण में शामिल एक प्रतिभागी का कहना था कि वह परीक्षण के दौरान गंभीर रूप से बीमार पड़ गया। बता दें कि सीआईआई ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और एस्ट्राजेनेका द्वारा तैयार कोविडशील्ड वैक्सीन का परीक्षण कर रही है।
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सीआईआई ने प्रतिभागी के परिवार द्वारा भेजे गए कानूनी नोटिस में कंपनी के ऊपर लगे आरोपों को दुर्भावनापूर्ण और गलत बताया। सीआईआई के बयान में कहा गया, कंपनी को प्रतिभागी की चिकित्सा स्थिति को लेकर चिंता थी, लेकिन वह वैक्सीन परीक्षण पर अपनी चिकित्सा समस्याओं के लिए झूठा आरोप लगा रहा था।
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बयान में कहा गया, मेडिकल टीम ने पहले ही प्रतिभागी को इस बात की जानकारी दी थी कि उसकी चिकित्सा समस्या का वैक्सीन परीक्षण से कोई लेना-देना नहीं है। कंपनी ने आरोप लगाया कि इसके बावजूद प्रतिभागी का सार्वजनिक जाकर बयान देना पैसा ऐंठने के लिए था। इसमें कहा गया कि कंपनी की छवि धूमिल करने के प्रयास को लेकर वह प्रतिभागी से 100 करोड़ रुपये की मुआवजे की मांग कर सकती है।
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हालांकि, सीरम इंस्टीट्यूट के बयान ने इस बारे में कुछ नहीं कहा कि कंपनी ने खुद ही परीक्षण के दौरान किसी प्रतिकूल घटना की जानकारी क्यों नहीं दी। ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया और संस्थागत नैतिकता समिति जांच कर रही है कि क्या प्रतिभागी को दिए गए वैक्सीन के डोज के चलते ही उस पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है या फिर कोई और वजह है।
गौरतलब है कि ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और एस्ट्राजेनेका द्वारा तैयार कोरोना का टीका चेन्नई में परीक्षण के दौरान एक अक्तूबर को 40 वर्षीय एक व्यक्ति को लगा तो दस दिन बाद उसे मस्तिष्क संबंधी तकलीफ शुरू हो गई। उसने अपने पत्नी और बच्चे पहचानने से इंकार कर दिया।
परिवार ने परीक्षण पर सवाल उठाते हुए आइसीएमआर के महानिदेशक, सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया, ड्रग कंट्रोलर डीन को नोटिस भेज मानसिक शारीरिक रूप से हुई क्षति और भविष्य में इलाज के लिए पांच करोड़ रूपये के मुआवजे की मांग की है।