लड़ेंगे कोरोना से: सीरम संस्थान ने फिर से शुरू किया कोवाक्स निर्यात, कोविशील्ड की एक अरब खुराकों का आंकड़ा पार
कोविशील्ड टीके की एक अरब खुराकों का उत्पादन करने का अपना लक्ष्य प्राप्त करने के साथ भारतीय सीरम संस्थान ने कोवाक्स के लिए इसका निर्यात फिर से शुरू कर दिया है। पढ़िए पूरी रिपोर्ट...
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पुणे स्थित भारतीय सीरम संस्थान ने शुक्रवार को एलान किया कि इसने टीकों को साझा करने के लिए शुरू किए गए अंतरराष्ट्रीय कोवाक्स के लिए अपने कोविशील्ड टीकों का निर्यात फिर से शुरू कर दिया है। टीकों की पहली खेप शुक्रवार की सुबह एसआईआई उत्पादन केंद्र से रवाना हो गई थी। इन्हें कोवाक्स तंत्र के माध्यम से निम्न और मध्यम आय वर्ग वाले देशों में वितरित किया जाएगा। एसआईआई की टीकों की आपूर्ति साल 2022 की पहली तिमाही में तेजी से बढ़ने की उम्मीद है।
कोविशील्ड के निर्यात की फिर से शुरुआत इस तथ्य से जुड़ी हुई है कि एसआईआई ने टीके की एक अरब खुराकों के अपने मूल लक्ष्य को हासिल कर लिया है। कंपनी ने इस लक्ष्य को पाने के लिए इस साल के अंत तक की समय सीमा निर्धारित की थी, लेकिन इसने समय से पहले ही इसे पाने में सफलता दर्ज की है। कंपनी की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि एसआईआई ने यह मील का पत्थर अपने पुणे स्थित केंद्र में कोविशील्ड उत्पादन को तेजी से बढ़ाकर हासिल किया है।
एसआईआई का कहना है कि हम अपने टीका उत्पादन को और बढ़ाने के लिए लाइसेंस के तहत अन्य टीकों का उत्पादन भी करेंगे। इन टीकों में अमेरिकी कंपनी नोवावैक्स का टीका कोवावैर्स भी शामिल है। इस टीके को इसी महीने इंडोनेशिया और फिलीपींस ने अपने यहां आपातकालीन इस्तेमाल की अनुमति दी है। भारत में और विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की ओर से अभी कोवावैक्स टीके को मंजूरी देने की प्रक्रिया चल रही है और नियामकीय समीक्षाएं भी अभी लंबित हैं।
चार देशों को 50 लाख खुराकें भेजने की मिल चुकी है अनुमति
बीती 21 नवंबर को केंद्र ने सीरम संस्थान को कोवाक्स के तहत चार देशों को कोविशील्ड की 50 लाख खुराकों का निर्यात करने की अनुमति दी थी। ये देश नेपाल, ताजिकिस्तान, मोजांबिक और बांग्लादेश हैं।
इससे पहले सरकार ने अक्तूबर में ‘वैक्सीन मैत्री’ कार्यक्रम के तहत नेपाल, म्यांमार और बांग्लादेश को कोविशील्ड की 10-10 लाख खुराकों के निर्यात की अनुमति दी थी।
वहीं, इसी दौरान संस्थान ने टीके के बढ़ते स्टॉक की वजह से बाकी टीकों के उत्पादन और रखरखाव में आने वाली कठिनाइयों का हवाला देते हुए सरकार से आपूर्ति तेज करने का अनुरोध किया था।