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सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मिले बिछुड़े पांच परिवार, 3 सालों से थे अलग

Fri, 14 Sep 2018 01:22 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुवाहाटी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुवाहाटी Updated Fri, 14 Sep 2018 01:22 PM IST
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separated from over three years five families finally reunited after Supreme Court order

पिछले तीन सालों से अलग रह रहे और असम की दो जेलों में बंद पांच परिवारों को विदेशी ट्रिब्यूनल ने गैर-नागरिक घोषित कर दिया है। जिसके बाद यह सभी फाइनली मिल गए हैं। असम सरकार को सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को आदेश दिया है कि वह सुनिश्चित करे कि हिरासत शिविर में रहने वाले परिवार तत्काल आधार पर एक हो जाएं। 

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जस्टिस मदन बी लोकुर और दीपक गुप्ता की पीठ ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा, 'आप उन्हें इस तरह अपने परिवार से अलग नहीं कर सकते हैं।' मेहता असम सरकार की तरफ से कोर्ट में पेश हुए थे। असम सरकार ने गुरुवार को सोनितपुर जिले के तेजपुर में स्थित केंद्रीय कारागार में बंद पांच आदमियों को कोकराझार जिला जेल में बंद उनके परिवार से मिलाया। 
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बेंच ने राज्य सरकार से कहा कि वह कोकराझार के कैदियों को तेजपुर हस्तांतरित कर दें। बेंच ने कहा, 'ऐसा देखा गया है कि यदि कोई बच्चा 6 साल से नीचे का है तो उसे मां के साथ हिरासत में रखा जाता है। यदि 6 साल से ऊपर है और महिला है तो उसे मां के साथ रखा जाता है और पुरुष है तो पिता के साथ। हमारे नजरिए में परिवार को अलग करने का कोई उद्देश्य नहीं है। इसके विपरीत यह पारिवारिक जीवन के लिए हानिकारक है।'
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इन पांचों परिवार ने पहले राज्य के जेल अधिकारियों से खुद को मिलाने की गुजारिश की थी। वकील एएस तपादेर जोकि विदेशी ट्रिब्यूनल के मामले देखते हैं, उन्होंने कहा, 'परिवार अमूमन पुरुषों या महिलाओं के अधिकांश जेलों के घर के रूप में अलग हो जाते हैं।' सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को सभी राज्यों को 2014 की विज्ञप्ति को नजरअंदाज करने की वजह से लताड़ा। जिसके तहत हिरासत शिविरों का निर्माण करके अवैध नागरिकों की गतिविधियों को रोकना या उनकी नागरिकता की पुष्टि होने तक वहां रखा जाना था। इसी वजह से असम में बहुत बड़ी संख्या में अवैध घुसपैठिए या विदेशी नागरिक रहते हैं।

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