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सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई: वरिष्ठ वकील ने अस्पताल दी दलीलें, कहा- यहां आने से समस्या की पहचान करने में मदद मिली

Thu, 07 Oct 2021 01:49 AM IST
देव कश्यप न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: देव कश्यप Updated Thu, 07 Oct 2021 01:49 AM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में अस्पताल से शामिल हुए वकील। कहा, मैं आपका आभारी हूं। मैं अब काफी बेहतर हूं। अस्पताल आने से मुझे समस्या की पहचान करने में मदद मिली।

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Senior Lawyer Attends Supreme Court Hearing From Hospital
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को उस समय अनोखा दृश्य देखने को मिला जब एक वरिष्ठ वकील ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के कर्मचारियों को पदोन्नति में आरक्षण से संबंधित मामले में अस्पताल से दलीलें पेश कीं।

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डिजिटल तरीके से सुनवाई के दौरान जैसे ही वरिष्ठ अधिवक्ता स्क्रीन पर दिखे, न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव की अध्यक्षता वाली पीठ ने पूछा, "शुरू करने से पहले ... आप कैसे हैं?"
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वकील ने कहा, "मैं आपका आभारी हूं। मैं अब काफी बेहतर हूं। अस्पताल आने से मुझे समस्या की पहचान करने में मदद मिली।"

पीठ में न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति बीआर गवई भी शामिल थे। पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता से अपना ख्याल रखने को कहा। वरिष्ठ वकील ने आभार जताया और इसके बाद बहस शुरू की।
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प्रमोशन में रिजर्वेशन का मुद्दा: केंद्र सरकार ने कर्मचारियों के पक्ष में रखी ये दलीलें
केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से बुधवार को कहा कि यह ”जीवन का तथ्य” है कि करीब 75 साल बाद भी अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोगों को योग्यता के उस स्तर पर नहीं लाया जा सका है, जिस पर अगड़ी जातियां हैं। अब समय आ गया है जब रिक्तियों को भरने के लिए एससी, एसटी और ओबीसी के लिए कोई ठोस आधार दिया जाए। केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि यह ”जीवन का तथ्य” है कि करीब 75 साल बाद भी अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोगों को योग्यता के उस स्तर पर नहीं लाया जा सका है, जिस पर अगड़ी जातियां हैं।

अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव, न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति बीआर गवई की पीठ से कहा कि अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) से संबंधित लोगों के लिए समूह ए श्रेणी की नौकरियों में उच्च पद प्राप्त करना “अधिक कठिन” है और अब समय आ गया है, जब शीर्ष अदालत को रिक्त पदों को भरने के लिए एससी, एसटी और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए कुछ “ठोस आधार” देना चाहिए।


शीर्ष अदालत एससी और एसटी से संबंधित कर्मचारियों को पदोन्नति में आरक्षण से संबंधित मुद्दे पर दलीलें सुन रही थी। इसने कहा कि आंकड़ों से पता चलता है कि समूह ए की नौकरियों में संबंधित श्रेणियों का प्रतिनिधित्व कम है और यह “उचित नहीं” है कि इसमें सुधार करने की जगह समूह बी और सी श्रेणियों में पर्याप्त प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जा रहा है।

 

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