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गुरूद्वारा चुनाव में सहजधारी सिख नहीं कर सकेंगे मतदान

Tue, 26 Apr 2016 04:49 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 26 Apr 2016 04:49 AM IST
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Sehajdhari Sikh will not be able to vote in Gurdwara elections

सिख धार्मिक संस्थाओं में सहजधारी सिखों को मतदान से दूर रखने के लिए 91 साल पुराने कानून में संशोधन का विधेयक सोमवार को संसद में पारित हो गया। सिख समुदाय की लंबे से चली आ रही यह मांग अगले साल पंजाब में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले पूरी कर दी गई है। सिख गुरुद्वारा (संशोधन) विधेयक, 2016 राज्यसभा की मंजूरी के लगभग एक महीने बाद लोकसभा में पारित हो गया।

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इस बिल पर हो रही चर्चा पर जवाब देते हुए गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा सहजधारी सिखों को धार्मिक संस्थाओं के चुनाव में मतदान का अधिकार नहीं देने की मांग शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (एसजीपीसी) के सदस्यों और इसके पदाधिकारियों द्वारा की गई थी।
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उन्होंने कहा, ‘एसजीपीसी के पदाधिकारी और सदस्यों की हमेशा यह मांग रही है कि जो सिख नहीं है उन्हें (कानून के तहत गठित बोर्ड और समितियों के सदस्य को चुनने के लिए होने वाले चुनाव में) मतदान का अधिकार नहीं मिलना चाहिए।
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एसजीपीसी की 2001 की जनरल असेंबली ने भी इस संदर्भ में एक प्रस्ताव पारित किया था। हाईकोर्ट ने कहा था कि इसे सक्षम विधानमंडल द्वारा पारित कराए जाने की जरूरत है। राज्यसभा में भी यह बिल सर्वसम्मति से पारित हो गया।’

सहजधारी सिखों पर नहीं है कोई धार्मिक प्रतिबंध
जहां तक सिख धर्म के मूल सिद्धांतों की बात है तो सहजधारी सिखों पर कोई धार्मिक प्रतिबंध नहीं है। उनका यह नाम सिख गुरुद्वारा कानून, 1925 में तत्कालीन विशेष परिस्थितियों के तहत जोड़ा गया। 1944 में सहजधारियों को कानून के तहत बोर्ड और समितियों के चुनावों में सदस्य चुनने का अधिकार दिया गया था जिसे इस बिल में हटाने का प्रस्ताव किया गया है।

साजिश के तहत परिवारों को बांटने की कोशिश : कांग्रेस

Sehajdhari Sikh will not be able to vote in Gurdwara elections
कांग्रेस - फोटो : file photo

बिल पर हो रही चर्चा में भाग लेते हुए कांग्रेस के रवनीत सिंह बिट्टू ने कहा कि विधेयक में किए गए संशोधनों के मद्देनजर ‘सिख गुरुद्वारा एक्ट’ का नाम बदल कर ‘बादल गुरुद्वारा एक्ट’ कर देना चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘आप साजिश कर परिवारों को बांटने का प्रयास कर रहे हैं।’ उन्होंने कहा कि सरकार उन 70 लाख सिखों के साथ गलत कर रही है जिन्हें पिछले 60 साल से एसजीपीसी में मतदान का अधिकार था।  बिट्टू ने कहा कि सरकार पहले से ही पंजाब के अल्पसंख्यक समुदाय को उप-अल्पसंख्यक समुदाय में बांट रही है। इस पर शिरोमणि अकाली दल ने कहा कि वे इस मामले में राजनीति न करें।

70 लाख सिखों को नहीं होगा मतदान का अधिकार
बिट्टू ने कहा कि देश में सिखों की जनसंख्या 1.75 करोड़ थी। सिख गुरुद्वारा कानून में इस संशोधन से 70 लाख सिखों के मतदान का अधिकार चला जाएगा। उन्होंने कहा कि इस कानून में संशोधन करना उचित नहीं होगा क्योंकि अदालतों में कई मामले लंबित हैं।

इस बिल के पारित होने से सिख समुदाय में किसी तरह का विभाजन नहीं होगा। ऐसा लगता है कि जो लोग इस कानून में ‘संशोधन को रोकने का प्रयास कर रहे हैं’ वे  गुरुद्वारा की अवैध गतिविधियों में शामिल हैं। - प्रेम सिंह चंदूमाजरा, सांसद, शिरोमणि अकाली दल

यह विधेयक ऐसे मसले से जुड़ा है जिससे सिख के अलावा कोई दूसरा समुदाय प्रभावित नहीं होगा। गैर-सिख यह निर्णय करने की स्थिति में नहीं हैं कि कौन मतदान कर सकता है। इसका निर्णय सिख समुदाय ही कर सकता है। राजनीति मत करिए और मजाक मत बनाइए। 
- हरसिमरत कौर, केंद्रीय मंत्री और शिरोमणि अकाली दल की नेता

पंजाब की शिरोमणि अकाली दल की सरकार राजनीतिक लाभ के लिए धर्म का इस्तेमाल कर रही है। पंजाब में उनकी सीटें घट रही हैं इसलिए वे इसका गलत इस्तेमाल करना चाह रही हैं। - भगवंत मान, सांसद, आम आदमी पार्टी 

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