धर्म निरपेक्ष संविधान और खूबियों ने देश के युवाओं को कट्टरवाद से बचाया
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विदेश मंत्री ने सांसद के सवाल का उत्तर देते हुए कहा कि कट्टरवाद का खतरा भारत में ही नहीं पूरे विश्व में है और भारत के हर प्रदेश में है। इसको लेकर केन्द्र सरकार राज्य सरकारों के साथ संवेदनशील है। उन्होंने कहा कि जहां तक भारत का प्रश्न है तो यदि हम तुलना करें तो केवल 50 युवाओं के इसमें फंसकर उस ओर जाने की सूचना है। इसका कारण हमारे देश का धर्म निरपेक्ष संविधान है।
विदेशमंत्री ने कहा कि भारत में धर्माचार्य युवाओं को अमन चैन की शिक्षा देते हैं। इसके अलावा हमारे देश में पारिवारिक प्रथा भी युवाओं कट्टरवाद के चंगुल में फंसने से रोकती है। मां-बाप, भाई, बहन अपनों पर निगाह रखते हैं। विदेश मंत्री ने कहा कि भारत में संस्कार अहिंसात्मक है। हम हिंसा का विरोध करते हैं।
भारत करेगा अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन
भारत कट्टरवाद को केन्द्र में रखकर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन करेगा। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने लोकसभा को जानकारी देते हुए कहा कि इस कार्यक्रम की थीम दो विषय पर केन्द्रित होगी। पहला सीमा पार का आतंकवाद और दूसरा युवाओं को लक्षित करके कट्टरता फैलाने की मुहिम के विरुद्ध जागरुकता।
इस सम्मेलन में आसियान देशों के सभी सदस्य देशों को आमंत्रित किया जाएगा। विदेश मंत्री ने कहा कि अभी डिरेडिकलाइजेशन पर होने वाली इस कांफ्रेस के स्थान आदि के बारे में अंतिम निर्णय नहीं लिया जा सका है। उन्होंने कहा कि सरकार इस सम्मेलन को आयोजित करने की रुपरेखा तैयार कर रही है।
मलेशिया से मिली प्रेरणा
मलेशिया में डिरेजिकलाइजेशन कार्यक्रम चल रहा है। इस कार्यक्रम को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मलेशिया के प्रधानमंत्री के बीच चर्चा हुई। विदेश मंत्री के अनुसार इसके बाद विदेश राज्यमंत्री जनरल वीके सिंह ईस्ट एशिया सम्मेलन में भाग लेने गए।
बाद में प्रधानमंत्री मोदी भी गए तो वहां के प्रधानमंत्री ने कहा कि कट्टरवारवाद के विरुद्ध एक बड़ा सम्मेलन होना चाहिए। उधर से प्रस्ताव आया कि यह सम्मेलन भारत में हो तो अच्छा है और भारत ने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया।