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कोविड-19: कब खत्म होगा कोरोना? डीएसटी सचिव ने दिया यह जवाब, तीसरी लहर पर किया यह खुलासा
Tue, 11 May 2021 01:44 PM IST
प्रियंका तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: प्रियंका तिवारी
Updated Tue, 11 May 2021 01:44 PM IST
सार
कोरोना का वायरस बार-बार अपना स्वरूप बदल रहा है। इसके म्यूटेशन के कारण भारत में स्थिति बदल गई है। नए वैरिएंट्स के कारण देश में कोरोना के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
विस्तार
कोरोना का प्रकोप पूरी दुनिया में फैला हुआ है। भारत की बात करें तो इस महामारी के कारण यहां स्वास्थ्य व्यवस्था से लेकर अर्थव्यवस्था तक डगमगा गई है। ऐसे में सवाल भी उठा है कि कोरोना के केस अचानक कैसे तेजी से बढ़ गए? विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के सचिव,आशुतोष शर्मा ने इस सवाल का जवाब दिया है। एक समाचार चैनल से साक्षात्कार के दौरान उन्होंने कोरोना वायरस से संबंधित प्रश्नों पर अपनी राय रखी। पेश है इस बातचीत का कुछ अंश-
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क्या वैज्ञानिक समुदाय और डीएसटी ने अनुमान लगाया है कि भारत अभी किस तरह की कोविड-19 स्थिति का सामना कर रहा है?
कोरोना का वायरस बार-बार अपना स्वरूप बदल रहा है। इसके म्यूटेशन के कारण भारत में स्थिति बदल गई है। नए वैरिएंट्स के कारण देश में कोरोना के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। हालांकि, इस पर शोध अभी जारी है।
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किस वजह से तेजी से फैल गया वायरस?
दिल्ली में जनवरी 15 से जनवरी 23 के बीच पांचवां सीरोलॉजिकल सर्वे हुआ था, जिसमें 56 फीसदी लोगों में एंटीबॉडी मिला। 28 हजार पॉजिटिव लोगों का यह सैंपल था। यह मामले घटने के संकेत थे, लेकिन म्यूटेंट वायरस की वजह से मामले तेजी से बढ़ गए।
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क्या दूसरी लहर के आने और इसकी तीव्रता का कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण पहले से मौजूद था?
निस्संदेह, एक महामारी के भविष्य के विकास के लिए और संभावनाओं को संतुलित करने के लिए कई रणनीतियों के बारे में हमेशा अलग-अलग दृष्टिकोण और बहसें होती हैं। यह एक ऐसी समस्या है जिससे सभी देश जूझ चुके हैं। मैंने उस समय विभिन्न विश्व स्तर पर सम्मानित मॉडल की भविष्यवाणियों की जांच की, लेकिन इसकी गति और तीव्रता को समझने के लिए मार्च के अंत से लेकर अप्रैल की शुरुआत तक कोई ठोस वैज्ञानिक सबूत नहीं था। कई प्रासंगिक वैज्ञानिक तथ्यों को अभी भी जांचा और परखा जा रहा है।
कोरोना की दूसरी लहर कब तक जारी रहेगी?
इसे लेकर कई तरीकों से अनुमान लगाया जा रहा है। उदाहरण के तौर यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन, अशोका यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट जो संकेत देते हैं कि पीक केस रोजाना के हिसाब से 8 लाख, 5 से 6 लाख और 4 लाख मई की शुरुआत से अंत तक सामने आएंगे। यह जो मॉडल है वो संकेत दे रहा है कि पीक के दो महीने बाद केस वहीं पहुंच जाएंगे जो पहली लहर के समाप्त होने के वक्त थे। हालांकि सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क लगाना, आइसोलेशन, वैक्सीनेशन के साथ ही वायरस के म्यूटेशन पर बहुत कुछ निर्भर करता है।
कोरोना की तीसरी लहर कब तक आ सकती है?
ऐसा कोई मैथमेटिकल मॉडल नहीं है, जिससे आपदा की सटीक जानकारी हो सके। केवल जो इनपुट मिल रहे हैं उन्हीं के आधार पर ही अनुमान लगाया जा सकता है। वायरस का बिहेवियर कैसा है और यह कैसे बदल रहा है, इस पर अनुमान लगाया जा सकता है। कई सारे टॉप वैज्ञानिकों ने भारत में कोरोना की पहली लहर में मौत के आंकड़ों का अनुमान लगाया था, लेकिन जो अनुमान लगाया गया वैसा नहीं हुआ।
क्या सबको लग पाएगी वैक्सीन?
वैक्सीन की उत्पादन क्षमता को कई तरीकों से बढ़ाया जा रहा है। वैक्सीन बनाने के लिए कच्चे माल की उपलब्धता, कुछ शर्तों में छूट दी जा रही है। साथ ही विदेश की वैक्सीन को मान्यता दी गई है। देश में कई और वैक्सीन तैयार की जा रही है जिसे जल्द मान्यता मिल सकती है।