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दो नवंबर से यूपी में फिर से राहुल निकालेंगे संदेश यात्राएं
अमर उजाला ब्यूरो/ नई दिल्ली
Updated Tue, 25 Oct 2016 05:28 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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कांग्रेस यूपी में खोई जमीन तलाशने के लिए यात्राओं को मुफीद मान रही है। तीन बड़ी यात्राओं के बाद जिला स्तर पर निकाली जा रहीं राहुल संदेश यात्राएं दूसरे चरण में भी निकाली जाएंगी। अब दो से दस नवंबर के बीच विधानसभा के अंदर न्याय पंचायत स्तर पर राहुल संदेश यात्राएं निकाली जाएंगी। अभी तक राज्य में 75 रथनुमा गाड़ियां 15-27 अक्तूबर तक जिला स्तर पर दौड़ रहे हैं। कांग्रेस ने पार्टी कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने के लिए उनसे आइडिया भी मांगे हैं। अच्छे आइडिया पार्टी लागू भी करेगी।
दिल्ली स्थित कांग्रेस के वॉर रूम में यूपी चुनाव से जुड़े नेताओं के साथ हुई बैठक ये फैसला लिया गया। राज्य में अभी तक निकाली गई यात्राओं जिसमें राहुल गांधी की किसान महायात्रा भी शामिल है की समीक्षा हुई। बैठक में मौजूद प्रियंका गांधी ने बड़ी बारीकी से अभी तक हुई यात्राओं के नफे-नुकसान को भी जाना। प्रियंका ने किसान मांग पत्र को लेकर मिल रहे फीडबैक और रिस्पांस पर पूछताछ की। बैठक प्रदेश प्रभारी गुलाम नबी आजाद, मुख्यमंत्री पद की उम्मीदवार शीला दीक्षित, प्रदेश अध्यक्ष राजबब्बर, कैंपेन कमेटी के चेयरमैन संजय सिंह, सचिव प्रकाश जोशी और आरपीएन सिंह आदि मौजूद थे।
बैठक में राहुल गांधी की किसान महायात्रा के साथ मुख्यमंत्री पद की उम्मीदवार शीला दीक्षित और प्रदेश अध्यक्ष राजबब्बर की यात्राओं को लेकर लोगों के रूझान खासकर कार्यकर्ताओं के रुख को लेकर भी बैठक में चर्चा रही। बैठक में कुछ लोगों के विचार थे कि इससे पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह बढ़ा है। वहीं कुछ की राय थी कि खास लोगों को ही महत्व मिल सका। यूपी से आए नेताओं ने अपने-अपने अनुभव पार्टी नेताओं और खासकर प्रियंका गांधी का सुनाए। कुछ लोगों ने यात्राओं से विशेष लाभ न मिलने की बात भी कही। बावजूद अधिकतर की राय यही बनी है कि यूपी में यात्राओं ने कांग्रेस को एक बार फिर जमीन से जोड़ा है। लिहाजा राहुल संदेश यात्रा को और माइक्रोलेवल तक पहुंचाकर पार्टी के निचले स्तर के कार्यकर्ताओं को जोड़ने का फैसला लिया गया है।
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दिल्ली स्थित कांग्रेस के वॉर रूम में यूपी चुनाव से जुड़े नेताओं के साथ हुई बैठक ये फैसला लिया गया। राज्य में अभी तक निकाली गई यात्राओं जिसमें राहुल गांधी की किसान महायात्रा भी शामिल है की समीक्षा हुई। बैठक में मौजूद प्रियंका गांधी ने बड़ी बारीकी से अभी तक हुई यात्राओं के नफे-नुकसान को भी जाना। प्रियंका ने किसान मांग पत्र को लेकर मिल रहे फीडबैक और रिस्पांस पर पूछताछ की। बैठक प्रदेश प्रभारी गुलाम नबी आजाद, मुख्यमंत्री पद की उम्मीदवार शीला दीक्षित, प्रदेश अध्यक्ष राजबब्बर, कैंपेन कमेटी के चेयरमैन संजय सिंह, सचिव प्रकाश जोशी और आरपीएन सिंह आदि मौजूद थे।
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बैठक में राहुल गांधी की किसान महायात्रा के साथ मुख्यमंत्री पद की उम्मीदवार शीला दीक्षित और प्रदेश अध्यक्ष राजबब्बर की यात्राओं को लेकर लोगों के रूझान खासकर कार्यकर्ताओं के रुख को लेकर भी बैठक में चर्चा रही। बैठक में कुछ लोगों के विचार थे कि इससे पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह बढ़ा है। वहीं कुछ की राय थी कि खास लोगों को ही महत्व मिल सका। यूपी से आए नेताओं ने अपने-अपने अनुभव पार्टी नेताओं और खासकर प्रियंका गांधी का सुनाए। कुछ लोगों ने यात्राओं से विशेष लाभ न मिलने की बात भी कही। बावजूद अधिकतर की राय यही बनी है कि यूपी में यात्राओं ने कांग्रेस को एक बार फिर जमीन से जोड़ा है। लिहाजा राहुल संदेश यात्रा को और माइक्रोलेवल तक पहुंचाकर पार्टी के निचले स्तर के कार्यकर्ताओं को जोड़ने का फैसला लिया गया है।
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