Seat Sharing: 'बड़े उद्देश्य' के लिए कई राज्यों में बैकफुट पर कांग्रेस, पार्टी नेताओं की ये है असली चिंता
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विस्तार
समूचे विपक्ष की धुरी कांग्रेस इस समय पूरे देश में सीटों के समझौते को अंतिम रूप देने में जुटी है। लेकिन देश की सबसे बड़ी पार्टी होने के बाद भी कांग्रेस को लगभग हर राज्य में अपेक्षाकृत कम सीटों पर समझौता करना पड़ सकता है। दिल्ली में आम आदमी पार्टी उसे अधिकतम तीन सीटें देने को तैयार है, तो पंजाब में छह सीटों पर बातचीत चल रही है। यूपी में कांग्रेस के दावों से उलट सपा उसे अधिकतम दस से बारह सीटें देने की बात कह रही है।
पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी ने कांग्रेस और वाम दलों को मिलाकर दस से बारह सीटें देने का प्रस्ताव दिया है। इसमें कांग्रेस के खाते में अधिकतम छह सीटें तक आने की संभावना है, तो बिहार में भी कांग्रेस के बड़े दावों के बाद भी उसे चार से छह सीटें ही मिलने का अनुमान है। महाराष्ट्र में भी पार्टी महाअघाड़ी गठबंधन से सीटों के तालमेल को अंतिम रूप देने में जुटी है और अपने लिए बेहतर दावेदारी कर रही है, लेकिन माना जा रहा है कि शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट)-एनसीपी (शरद पवार गुट) उसे दस सीटों तक समेट सकते हैं।
पार्टी नेताओं की चिंता
कांग्रेस ने हाल ही में 20 दिसंबर से छह जनवरी के बीच उत्तर प्रदेश में यूपी जोड़ो यात्रा का आयोजन किया था। इसमें पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से शुरू करते हुए लखनऊ तक यात्रा निकाली गई थी। पार्टी नेताओं का दावा है कि उन्हें जनता के बीच बेहतर परिणाम मिलने की उम्मीद दिखाई पड़ी थी। पार्टी ने प्रदेश की सभी 80 लोकसभा सीटों पर अपने ऑब्जर्वर नियुक्त कर दिये हैं और 12 जनवरी को दिल्ली के पार्टी मुख्यालय पर इनकी मीटिंग है, जिसमें आगामी लोकसभा चुनावों को लेकर अंतिम रणनीति बनाई जाएगी।
यूपी के एक शीर्ष कांग्रेस नेता के अनुसार, यदि पार्टी कम सीटों पर समझौते करती है, तो इससे वह दिल्ली-बिहार-बंगाल की तरह कमजोर हो जाएगी। जिन सीटों पर पार्टी कार्यकर्ता पार्टी को मजबूत करने के लिए यात्राएं निकाल रहे हैं, और काम कर रहे हैं, यदि वे सीटें समझौते में सपा या बसपा को दी जाती हैं, तो इससे कार्यकर्ताओं का मनोबल टूटता है। उन्होंने कहा कि पार्टी को सीटों के मामले में कम पर समझौता नहीं करना चाहिए। सीटें यूपी के हर क्षेत्र में होनी चाहिएं, जिससे पूरे प्रदेश में पार्टी की उपस्थिति बनी रहे।
इन राज्यों में कांग्रेस को बेहतर करने की उम्मीद
हालांकि, जिन राज्यों में भाजपा के सामने कांग्रेस ही मुख्य विपक्षी दल है, वहां पार्टी बेहतर प्रदर्शन करने की कोशिश करेगी। इन राज्यों में राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड प्रमुख हैं। कुछ समय पूर्व हुए पांच राज्यों के चुनावों में पार्टी को मिले वोट प्रतिशत के आधार पर पार्टी को उम्मीद है कि वह इन राज्यों में बेहतर प्रदर्शन करेगी। इनमें से कई राज्यों में भाजपा ने पिछले लोकसभा चुनावों में क्लीन स्वीप किया था, लेकिन कांग्रेस को उम्मीद है कि इस बार वह इन राज्यों में बेहतर प्रदर्शन कर अपनी सीटों की संख्या में बढ़ोतरी करने में सफल रहेगी।
विपक्ष में ताकत बढ़ाना जरूरी
कांग्रेस नेताओं के अनुसार, उनकी सबसे बड़ी कोशिश भाजपा को बहुमत के आंकड़े 272 से पहले रोकना है। इसके बाद चुनाव परिणामों के आधार पर विपक्ष का नेता चुन लिया जाएगा। जिन राज्यों में कांग्रेस, भाजपा के मुख्य मुकाबले में है, वह अपनी सीटें वहां बढ़ाएगी और विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरने की कोशिश करेगी। साथ ही सहयोगियों के बेहतर करने में भी पार्टी अपना हर संभव योगदान देने की कोशिश करेगी, जिससे सरकार बनाने की स्थिति बन सके।
नेता के अनुसार, कुछ राज्यों में कांग्रेस कम सीटों पर समझौता करती दिखाई पड़ सकती है, लेकिन इसका बड़ा कारण है कि वह बड़े उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए अपने हितों से समझौता कर रही है। सही समय आने पर पार्टी एक बार फिर मजबूती के साथ राज्यों में भी मजबूत होने की कोशिश करेगी।