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Supreme Court: बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की बोली से जुड़ी एलएंडटी की याचिका खारिज; शीर्ष कोर्ट ने कही ये बात

Fri, 30 May 2025 06:36 PM IST
शिव शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शुक्ला Updated Fri, 30 May 2025 06:36 PM IST
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scrapped tender process for infrastructure projects, Mumbai development body to supreme court updates news
सुप्रीम कोर्ट (फाइल) - फोटो : ANI

मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (एमएमआरडीए) ने मुंबई में दो प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए निविदा प्रक्रिया रद्द करने के फैसले के बारे में सुप्रीम कोर्ट को जानकारी दी है। एमएमआरडीए ने लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) की याचिका पर सुनवाई के दौरान सीजेआई बी आर गवई की अध्यक्षता वाली पीठ को  बताया कि परियोजनाओं के लिए निविदा प्रक्रिया रद्द कर दी गई है।

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बता दें कि लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) ने एमएमआरडीए के उस फैसले के खिलाफ याचिका दाखिल की थी, जिसमें लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) को 6,000 करोड़ रुपये की ठाणे-घोड़बंदर से भयंदर तक सुरंग और एलिवेटेड रोड के निर्माण से संबंधित परियोजनाओं के लिए बोली लगाने से अयोग्य घोषित किया गया था। 
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सुनवाई की शुरुआत में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और एमएमआरडीए की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने सीजेआई बी आर गवई की अध्यक्षता वाली पीठ को बताया कि परियोजनाओं के लिए निविदा प्रक्रिया रद्द कर दी गई है। सभी पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद सीजेआई ने मामले को बंद कर दिया। साथ ही टिप्पणी करते हुए कहा कि यह स्पष्ट और उचित रूप से कहा गया है कि व्यापक जनहित में पूरी निविदा प्रक्रिया को रद्द कर दिया गया है। ऐसे में एलएंडटी की याचिका को निष्फल मानते हुए खारिज किया जाता है। 

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महिला को गैरकानूनी तरीके से पुलिस हिरासत में रखने पर सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने असम पुलिस द्वारा एक महिला को कथित गैरकानूरी तरीके से हिरासत में रखने के खिलाफ याचिका पर 2 जून को सुनवाई करेगा। अवैध बांग्लादेशियों को निर्वासित करने के आरोपों के बीच एक व्यक्ति ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है, जिसमें कहा गया है कि असम पुलिस ने उसकी मां को गैरकानूनी तरीके से हिरासत में रखा हुआ है।

सीजेआई बीआर गवई, जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह और जस्टिस एएस चंदुरकर के समक्ष याचिकाकर्ता यूनुस अली के वकील शोएब आलम ने कहा कि राज्य की पुलिस ने उसके मुवक्किल की मां को हिरासत में रखा हुआ है। अली ने याचिका में आरोप लगाया है कि धुबरी पुलिस ने बयान दर्ज करने के बहाने उसकी मां मोनोवारा बेवा को 24 मई से हिरासत में ले रखा है। अली ने याचिका में अपनी मां की जल्द रिहाई करने की मांग की है। वकील ने असम में इस तरह के चलन को गंभीर चिंता का विषय बताया है, जिसमें कानूनी मामले अदालत में लंबित होने के बावजूद लोगों को हिरासत में लेकर रातो रात बांग्लादेश भेजा जा रहा है। आलम ने कहा कि अली की मां ने 2017 में विशेष अनुमति याचिका दायर की थी। नोटिस जारी किए जा चुके हैं, इस अदालत में मामले लंबित हैं फिर भी लोगों को निर्वासित किया जा रहा है। अली की मां 12 दिसंबर, 2019 से जमानत पर है।

 सुप्रीम कोर्ट ने मनोरंजन पार्क से जुड़े मामले में खारिज किया बॉम्बे हाईकोर्ट का आदेश  
 सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को मुंबई के कांदीवली पश्चिम में ऐतिहासिक खजूरिया झील के एक स्थल पर ग्रेटर मुंबई नगर निगम (एमसीजीएम) द्वारा बनाए गए मनोरंजन पार्क को ध्वस्त करने का निर्देश देने वाले बॉम्बे हाईकोर्ट के 2018 के फैसले को खारिज कर दिया।

जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने यह आदेश दिया। पीठ ने नगर निकाय की दलील को स्वीकार किया। इस दौरान पीठ ने कहा कि भले ही हाईकोर्ट द्वारा सार्वजनिक ट्रस्ट सिद्धांत को लागू करना सही था, लेकिन यह जमीनी स्तर पर 'बदली हुई वास्तविकताओं' और पुनर्विकसित स्थल से प्राप्त होने वाले पर्याप्त सार्वजनिक लाभों को ध्यान में रखने में विफल रहा।

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