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इन कारणों से अभी और 7 हफ्ते कम नहीं होंगी बैंक की लाइनें
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Tue, 22 Nov 2016 10:43 AM IST
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कैश
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8 नवंबर को 500 और 1000 के पुराने नोट बंद करने के सरकार के फैसले के बाद पूरे देश में लोग कैश के लिए परेशान हैं। वित्त मंत्रालय ने समय-मसय पर कई तरह की गाइडलाइन जारी करके लोगों को सहूलियत देने की कोशिश की। लेकिन, फिर भी एटीएम पर लंबी लाइनें लगी हुई हैं। जिनके घरों में शादी या किसी तरह का मांगलिक कार्यक्रम हैं उन्हें ज्यादा परेशानियों का सामनना करना पड़ रहा है।
आरबीआई के एक डाटा के मुताबिक, बाजार में तकरीबन 14 लाख करोड़ रुपए के बड़े करेंसी नोट हैं। वहीं, 8 नवंबर के बाद से अब तक 1.36 लाख करोड़ रुपए बाजार में आए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, अब तक 10 फीसदी से भी कम मुल्य का कैश बदला जा सका है।
अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक, 8 से 10 नवंबर के बीच बैंकों को 544517 करोड़ रुपए के पुराने नोट मिले हैं। इस दौरान खाता धारकों ने करीब 1,03,316 करोड़ रुपए बैंक की शाखाओं और एटीएम$ से निकाले हैं, जबकि 33,006 करोड़ रुपए के पुराने नोट बदले गए हैं।
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स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की चीफ इकॉनमिस्ट सौम्या कांति घोष के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि कैश की जरूरत का अंदाजा लोगों द्वारा दो महीने के उपभोग की जरूरतों से लगाया गया था। इसे पैमाना माना जाता है तो अभी 10 लाख करोड़ रुपए की नई करंसी और छापनी पड़ेगी।
रिपोर्ट के मुताबिक, बैंक यदि मौजूदा रफ्तार से भी नए नोट बांटते रहे तो 10 लाख करोड़ रुपए को पूरा करने में करीब सात हफ्ते और लग जाएंगे।
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आरबीआई के एक डाटा के मुताबिक, बाजार में तकरीबन 14 लाख करोड़ रुपए के बड़े करेंसी नोट हैं। वहीं, 8 नवंबर के बाद से अब तक 1.36 लाख करोड़ रुपए बाजार में आए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, अब तक 10 फीसदी से भी कम मुल्य का कैश बदला जा सका है।
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अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक, 8 से 10 नवंबर के बीच बैंकों को 544517 करोड़ रुपए के पुराने नोट मिले हैं। इस दौरान खाता धारकों ने करीब 1,03,316 करोड़ रुपए बैंक की शाखाओं और एटीएम$ से निकाले हैं, जबकि 33,006 करोड़ रुपए के पुराने नोट बदले गए हैं।
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स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की चीफ इकॉनमिस्ट सौम्या कांति घोष के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि कैश की जरूरत का अंदाजा लोगों द्वारा दो महीने के उपभोग की जरूरतों से लगाया गया था। इसे पैमाना माना जाता है तो अभी 10 लाख करोड़ रुपए की नई करंसी और छापनी पड़ेगी।
रिपोर्ट के मुताबिक, बैंक यदि मौजूदा रफ्तार से भी नए नोट बांटते रहे तो 10 लाख करोड़ रुपए को पूरा करने में करीब सात हफ्ते और लग जाएंगे।
करेंसी कागज में कमी
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अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने नए नोट छापने का टेंडर ही अभी तक नहीं दिया है। मैसूर के पेपर मिल में बचे करेंसी कागज से ही काम चलाया जा रहा है। वहां सिर्फ जरूरत का 5 फीसदी कागज ही तैयार करने की छमता है। कैश के संकट को देखते हुए अमेरिका, इंग्लैंड और जर्मनी की कंपनियों को टेंडर प्रक्रिया में शामिल करने के लिए प्रस्ताव भेजा जा रहा है।
आरबीआई की रिपोर्ट में कहा गया है कि नए नोट के लिए 22 हजार मीट्रिक टन करेंसी कागज की जरूरत होगी। रिपोर्ट में रिजर्व बैंक ने कहा है कि अभी देवास और नाशिक के प्रिंटिंग प्रेस में पुराने नोटों का स्क्रैप हटाने की चुनौती है।
आरबीआई की रिपोर्ट में कहा गया है कि नए नोट के लिए 22 हजार मीट्रिक टन करेंसी कागज की जरूरत होगी। रिपोर्ट में रिजर्व बैंक ने कहा है कि अभी देवास और नाशिक के प्रिंटिंग प्रेस में पुराने नोटों का स्क्रैप हटाने की चुनौती है।
स्याही भी पड़ सकते हैं कम
cash seized
वहीं एक दूसरी रिपोर्ट के मुताबिक, स्विट्जरलैंड की कंपनी एसआईसीपीए भारत को नोटों की छपाई के लिए स्याही की आपूर्ति करती है। आरबीआई जरूरत के हिसाब से स्याही खरीदती है। बताया जा रहा है कि सरकार के पास इस स्याही की भी कमी पड़ गई है।
एक तरफ जहां लोग कैश की समस्या से जूझ रहे हैं, वहीं नोट छापने के लिए जरूरी कागज और स्याही की कमी की खबरों से लोग और तनाव में दिख रहे हैं।
एक तरफ जहां लोग कैश की समस्या से जूझ रहे हैं, वहीं नोट छापने के लिए जरूरी कागज और स्याही की कमी की खबरों से लोग और तनाव में दिख रहे हैं।