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SCO Summit : एससीओ में शी जिनपिंग और पुतिन की केमिस्ट्री ने दुनिया को क्या संदेश दिया?

Sat, 17 Sep 2022 07:36 AM IST
Shashidhar Pathak शशिधर पाठक
Updated Sat, 17 Sep 2022 07:36 AM IST
सार

एससीओ में प्रधानमंत्री मोदी का रूख शानदार और संतुलित रहा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कोविड-19 संक्रमण के बाद बढ़ी आर्थिक चुनौतियों की तरफ ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने भारत की विकास दर 7.5 प्रतिशत रहने का अनुमान व्यक्त किया और देश को उत्पादन क्षेत्र का हब बनाने को प्रमुख बताया।

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SCO Summit: What message did Xi Jinping and Putins chemistry in SCO give to the world
SCO समिट की बैठक - फोटो : ANI

विस्तार

शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) में रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ जो केमिस्ट्री का संकेत दिया है, उसके माने क्या हैं? इस सवाल का जवाब न केवल भारत के कूटनीति और विदेश नीति के रणनीतिकार ढूंढ रहे हैं, बल्कि अमेरिका और यूरोप की निगाह भी इसी के इर्द गिर्द टिकी है। पुतिन ने जिस तरह से शी जिनपिंग की तारीफ में कूटनीतिक तरीका अपनाया, वह एक साथ कई संदेश दे रहा है। डोकलाम से लेकर लद्दाख तक चीन के साथ विश्वसनीयता का संकट झेल रहे भारत और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लिए भी इसमें एक संदेश छिपा है। 

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इस दौरान सबसे बड़ा संदेश शी जिनपिंग ने दिया है। शी जिनपिंग ने अपने संबोधन में कहीं भी यूक्रेन पर रूस के आक्रामण का जिक्र नहीं किया। विदेश मामलों के जानकार वरिष्ठ पत्रकार रंजीत कुमार का कहना है कि शी जिनपिंग बड़ी चतुराई से मंच पर आए। अपनी बात कहे और जहां निशाना साधना था, साध गए। राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन ने इस दौरान राष्ट्रपति शी जिनपिंग के संतुलित रवैये की तारीफ भी की । एक तरह से बताने की कोशिश की रूस और चीन का रिश्ता मजबूत दिशा में बढ़ रहा है। दोनों में क्लोज बांडिंग है।
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कई मुश्किलों में घिरे हैं शी जिनपिंग और व्लादिमीर पुतिन
दुनिया की दूसरे नंबर की अर्थव्यवस्था वाला चीन आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। वहां केन्द्रीय बैंक ने हालात से निबटने के लिए होम लोन की दरों को 0.10 प्वाइंट तक घटाते हुए 3.65 प्रतिशत पर ला दिया है। कोविड-19 के दौरान शी जिनपिंग की सख्त गाइड लाइन ने पूरे देश की अर्थ व्यवस्था को तगड़ा झटका दिया है। विश्व में भी चीन को लेकर नकारात्मकता का माहौल तेजी से बढ़ा है। दूसरे चीनी कम्युनिस्ट पार्टी कांग्रेस की अब कुछ ही गिनती के शेष हैं। इसमें राष्ट्रपति शी जिनपिंग को तीसरी बार राष्ट्रपति बनने का अवसर मिलेगा। सबकुछ बेहतर रहा तो जिनपिंग और ताकतवर बनकर उभरेंगे। ऐसे में शी जिनपिंग कहीं से भी नहीं चाहेंगे कि उनके विरोधियों को आलोचना का बड़ा अवसर मिले। उनकी स्थिति कहीं से भी कमजोर हो।
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इसी तरह की कुछ मुश्किल राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन के भी सामने है। यूक्रेन युद्ध के बाद रूस कड़े आर्थिक प्रतिबंधों का सामना करना पड़ रहा है। इसका सीधा असर उसकी अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। इस कठिन दौर में उसे चीन से बहुत कुछ चाहिए। सहयोगी देशों से भी उसकी जरूरतें बढ़ी हुई हैं। दूसरे यूक्रेन युद्ध नाक का सवाल बनता जा रहा है। जिस तरह से यूक्रेन में रूस की सेना के पीछे हटने की खबरे आई हैं, वह भी किसी बड़ी चिंता से कम नहीं हैं। इस तरह से यह वह जटिल समय है जब रूस को मजबूत सहयोगी देशों के साथ खड़े होने की जरूरत है।

अमेरिका की एक ध्रवीय दुनिया को बड़ा झटका देना है मकसद
तमाम कूटनीतिक जानकारों का कहना है कि अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन की नीतियों से उनके देश की दुनिया में काफी हेठी हुई है। रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन लगातार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका की मोनोपोली तोडऩे में लगे हैं। सीरिया में बसर-अल-अशद की सरकार को बचाने में रूस के सहयोग ने अमेरिका को पहला बड़ा झटका दिया था। इसके बाद यूक्रेन में रूस की सेनाओं के घुसने के बाद चीन से मिले सहयोग ने ब्लादिमीर पुतिन के हौसले को जहां बढ़ाया, वहीं हालात की गंभीरता को देखकर अमेरिका को ठिठकने के लिए मजबूर होना पड़ा। 

शंघाई सहयोग संगठन में रूस और चीन ने साथ खड़े होने का संकेत देकर इसी अध्याय को आगे बढ़ाया है। भारत के एक पूर्व राजनयिक का कहना है कि मुझे इस बार एससीओ से कोई बड़ी उम्मीद नहीं दिखाई दे रही थी। इसे बेनतीजा या कह लें कि कोई बड़ा निर्णय न हो पाने जैसा पहले से लग रहा था। इस बार तो मुख्य आकर्षण रूस और चीन के करीब आने या कुछ दूरी बनने के संकेत पर ही दुनिया की निगाह थी। मुझे लग रहा है कि रूस को जो संदेश देना था, पुतिन उसे दे चुके हैं।

भारत, पाकिस्तान सबने की अपनी अपनी बात
एससीओ में प्रधानमंत्री मोदी का रूख शानदार और संतुलित रहा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कोविड-19 संक्रमण के बाद बढ़ी आर्थिक चुनौतियों की तरफ ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने भारत की विकास दर 7.5 प्रतिशत रहने का अनुमान व्यक्त किया और देश को उत्पादन क्षेत्र का हब बनाने को प्रमुख बताया। यह निवेश के लिए भारत को अच्छा विकल्प बताने से जुड़ा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी राष्ट्रपति पुतिन से मंहगे ईधन तेल, ऊर्वरक के बढ़े दाम और आपूर्ति के संकत, सप्लाई चैन टूटने से पैदा हुई चुनौतियां तथा खाद्य संकट के मुद्दे पर सहयोग मांगा। प्रधानमंत्री मोदी ने रूस के राष्ट्रपति से कहा कि यह समय(एरा) युद्ध का नहीं है और इसको लेकर रूस के राष्ट्रपति ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। एक तरह से उन्होंने यूक्रेन से युद्ध की स्थिति का पूरा कारण यूक्रेन को बताया।  

अफगानिस्तान में शांति और स्थिरता को प्रमुखता देकर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ ने अपने देश भौगोलिक और राजनीतिक अहमियत को धार देने की कोशिश की। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति शी जिनपिंग से भेंट और द्विपक्षीय वार्ता की। उन्होंने सीपीईसी को भी धार देने की कोशिश की। शहबाज शरीफ की भेंट रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन से भी हुई और उन्होंने पाकिस्तान को ऊर्जा संकट से निबटने  में सहयोग का भरोसा दिया। रूस और पाकिस्तान के बीच में बढ़ रही इस निकटता पर भारत के रणनीतिकारों की भी निगाह है।


अगली बार भारत करेगा एससीओ की अगुआई
एससीओ की अगली बैठक की मेजबानी भारत करेगा। इसकी अध्यक्षता का भार नई दिल्ली के पास आ गया है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भारत की अगुआई में एससीओ का अगला शिखर सम्मेलन होने की दशा में सहयोग देने का भरोसा जताया है।

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