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उपलब्धि : कैंसर टीके की खोज में वैज्ञानिकों को मिली सफलता, अगले पांच वर्षों में और अधिक आएंगे टीके
Tue, 27 Jun 2023 06:16 AM IST
वीरेंद्र शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: वीरेंद्र शर्मा
Updated Tue, 27 Jun 2023 06:16 AM IST
सार
अमेरिका के राष्ट्रीय कैंसर संस्थान के डॉ. जेम्स गुले ने कहा है कि इन टीकों के जरिये कैंसर कोशिकाओं को खोजने और मारने के लिए इन्सानों की प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ा सकते हैं। इसके लिए एमआरएनए तकनीक का इस्तेमाल भी किया जा सकता है।
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कैंसर सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : istock
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विस्तार
जानलेवा कैंसर से लोगों को बचाने के लिए दशकों से चली आ रही खोज में वैज्ञानिकों को सफलता मिली है। इसी आधार पर वैज्ञानिकों ने कहा है कि यह खोज एक महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच गई है। कैंसर के इलाज में अब अगली बड़ी प्रगति टीका हो सकती है। इन्होंने संभावना व्यक्त की है कि अगले पांच वर्षों में और अधिक टीके आएंगे।
अमेरिका के राष्ट्रीय कैंसर संस्थान के डॉ. जेम्स गुले ने कहा है कि इन टीकों के जरिये कैंसर कोशिकाओं को खोजने और मारने के लिए इन्सानों की प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ा सकते हैं। इसके लिए एमआरएनए तकनीक का इस्तेमाल भी किया जा सकता है, जिसे हाल ही में कोरोना महामारी को लेकर इस्तेमाल में लाया गया। अमेरिका के सिएटल स्थित यूडब्ल्यू मेडिसिन के डॉ. नोरा डिसिस का कहना है कि कैंसर के खिलाफ टीका विकसित करने के लिए उसे इन्सानों की प्रतिरक्षा प्रणाली की टी कोशिकाओं के रूप की पहचान करना सिखाना है। इसके बाद शरीर में कहीं भी पहुंचने पर टी कोशिकाओं से जुड़े खतरे का पता लगा सकती है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि उनकी यह खोज पूरी दुनिया के लिए एक नया वरदान साबित हो सकती है, जिसमें भारत भी शामिल है। हाल ही के अध्ययनों से यह पता चला है कि भारत में कैंसर के मामले 2022 में 14.6 लाख से बढ़कर 2025 में 15.7 लाख तक पहुंच सकते हैं। ऐसे में लगातार बढ़ते बीमारी के दायरे को टीका के जरिए रोकने में सफलता हासिल की जा सकती है।
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अमेरिका के राष्ट्रीय कैंसर संस्थान के डॉ. जेम्स गुले ने कहा है कि इन टीकों के जरिये कैंसर कोशिकाओं को खोजने और मारने के लिए इन्सानों की प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ा सकते हैं। इसके लिए एमआरएनए तकनीक का इस्तेमाल भी किया जा सकता है, जिसे हाल ही में कोरोना महामारी को लेकर इस्तेमाल में लाया गया। अमेरिका के सिएटल स्थित यूडब्ल्यू मेडिसिन के डॉ. नोरा डिसिस का कहना है कि कैंसर के खिलाफ टीका विकसित करने के लिए उसे इन्सानों की प्रतिरक्षा प्रणाली की टी कोशिकाओं के रूप की पहचान करना सिखाना है। इसके बाद शरीर में कहीं भी पहुंचने पर टी कोशिकाओं से जुड़े खतरे का पता लगा सकती है।
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वैज्ञानिकों का कहना है कि उनकी यह खोज पूरी दुनिया के लिए एक नया वरदान साबित हो सकती है, जिसमें भारत भी शामिल है। हाल ही के अध्ययनों से यह पता चला है कि भारत में कैंसर के मामले 2022 में 14.6 लाख से बढ़कर 2025 में 15.7 लाख तक पहुंच सकते हैं। ऐसे में लगातार बढ़ते बीमारी के दायरे को टीका के जरिए रोकने में सफलता हासिल की जा सकती है।
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