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दृष्टिबाधित दिव्यांगों को बस में चढ़ने में मदद करेगी ये डिवाइस, बस चालकों से सीधे कर सकेंगे बात
Thu, 10 Oct 2019 08:14 PM IST
Harendra Chaudhary
अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Thu, 10 Oct 2019 08:14 PM IST
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Person With Disability in Bus
- फोटो : Social Media (फाइल)
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दृष्टिबाधित दिव्यांगजनों के लिए दिल्ली की भीड़ भरी सड़कों पर चलना बेहद मुश्किल भरा काम होता है। बस स्टॉप पर आने वाली बस कौन सी है और वह कहां जाएगी, इस जानकारी के लिए उन्हें हमेशा अपने आसपास खड़े लोगों पर निर्भर रहना पड़ता है। वहीं बहुत सवेरे या देर रात जब अधिक लोग नहीं होते, उन्हें यह मदद मिलना भी मुश्किल हो जाता है। लेकिन जल्दी ही दृष्टिबाधित दिव्यांगों को इस समस्या से मुक्ति मिल सकती है। आईआईटी दिल्ली के वैज्ञानिक एम. बालाकृष्णन ने एक ऐसी डिवाइस तैयार की है, जो दृष्टिबाधित दिव्यांगजनों और आने वाली बसों के ड्राइवर के बीच सीधे संपर्क स्थापित कर देगा। इसके जरिए दिव्यांग आसानी से अपनी मनचाही बस का चयन कर सकेंगे।
दोनों डिवाइस आपस में रेडियो फ्रिक्वेंसी के जरिए जुड़ेंगी। दोनों डिवाइस लगभग 25 मीटर की दूर से भी आपस में संपर्क कर सकेंगी। एक हजार बसों में इस तरह की डिवाइस लगाने का खर्च लगभग 2.5 करोड़ रुपये आएगा। दिव्यांगजन आयुक्त कार्यालय डीटीसी भी इस तकनीकी के खरीदे जाने की संभावनाओं पर विचार कर रहा है।
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कैसे काम करेगी डिवाइस
डिवाइस का एक हिस्सा बस ड्राइवर या कंडक्टर के पास होगा, जबकि एक छोटा सा दूसरा हिस्सा दृष्टिबाधित दिव्यांग के पास होगा। इसी के जरिए वे बस चालक से 'बात' कर सकेंगे। बस स्टॉप पर खड़े दिव्यांगजन को जैसे ही किसी बस के आने की आवाज सुनाई पड़ेगी, वह अपने डिवाइस पर 'प्रेस बटन' दबाकर बस संख्या के बारे में चालक से पूछ सकेगा। संकेत मिलते ही बस चालक अपनी डिवाइस पर एक बटन दबाकर अपनी बस संख्या दृष्टिबाधित यात्री को बता देगा, जिसे यात्री अपनी डिवाइस पर सुन सकेगा। अगर बस उसके काम की हुई तो वह 'सेलेक्ट' के नाम से दूसरी बटन दबाकर चालक को इशारा कर सकेगा। इसके बाद बस चालक उसके पास बस रोककर उसे बिठा सकेगा।
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दोनों डिवाइस आपस में रेडियो फ्रिक्वेंसी के जरिए जुड़ेंगी। दोनों डिवाइस लगभग 25 मीटर की दूर से भी आपस में संपर्क कर सकेंगी। एक हजार बसों में इस तरह की डिवाइस लगाने का खर्च लगभग 2.5 करोड़ रुपये आएगा। दिव्यांगजन आयुक्त कार्यालय डीटीसी भी इस तकनीकी के खरीदे जाने की संभावनाओं पर विचार कर रहा है।
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