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सरकार ने कहा, 2021 तक कोरोना वैक्सीन आने की कोई संभावना नहीं, फिर बयान से लिया यू-टर्न
Mon, 06 Jul 2020 10:16 AM IST
अनवर अंसारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अनवर अंसारी
Updated Mon, 06 Jul 2020 10:16 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : PTI
कोरोना वायरस की वैक्सीन की टाइमलाइन को लेकर भारत में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। दरअसल, विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले 'विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग' (डीएसटी) ने प्रेस विज्ञप्ति में कोरोना वैक्सीन के 2021 तक आने की संभावना का उल्लेख किया, लेकिन बाद में इसे विज्ञप्ति में से हटा दिया।
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हाल ही में, भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने 15 अगस्त तक कोविड-19 की वैक्सीन भारत में उपलब्ध कराने की बात कही थी, जिसे लेकर विशेषज्ञों ने हड़बड़ी से बचने की सलाह दी थी। वहीं, अब डीएसटी द्वारा विज्ञप्ति में से वैक्सीन के 2021 तक आने की बात को हटाना सरकार के लिए अधिक परेशानी वाला सबब बन गया है।
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डीएसटी की प्रेस विज्ञप्ति में दुनियाभर में विकसित किए जा रहे विभिन्न वैक्सीन विकल्पों की व्याख्या की गई थी, इसमें बताया गया था कि मानव परीक्षण के लिए 11 उम्मीदवारों में से दो भारतीय कंपनियां भी हैं, जिन्हें परीक्षण की अनुमति दी गई है। साथ ही इसमें इस बात का भी उल्लेख किया गया था कि कोई भी वैक्सीन 2021 से पहले उपलब्ध नहीं होगी।
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आईसीएमआर ने शनिवार को कहा कि वह महामारी के लिए तेजी से टीका बनाने के वैश्विक रूप से स्वीकार्य सभी नियमों के अनुरूप काम कर रहा है। दो जुलाई को लिखे एक पत्र में आईसीएमआर के महानिदेशक बलराम भार्गव ने कहा कि सरकार ने कोविड-19 के खिलाफ भारत में तैयार किए गए वैक्सीन को 15 अगस्त तक तैयार करने का लक्ष्य रखा है।
पत्र में उन्होंने चयनित चिकित्सा संस्थानों और अस्पतालों के प्रमुख अन्वेषकों को भारत बायोटेक के साथ साझेदारी में विकसित किए जा रहे टीके ‘कोवैक्सिन’ के लिए मनुष्य के ऊपर परीक्षण की मंजूरी जल्द से जल्द देने को कहा है।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, आईसीएमआर द्वारा 15 अगस्त तक वैक्सीन तैयार करने के दावे को लेकर चिकित्सा और विज्ञान समुदाय और सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने संस्थान की विश्वसनीयता और आचार पर संदेह व्यक्त किया।
इस संदर्भ में, जब डीएसटी ने कहा कि 2021 तक वैक्सीन तैयार होने की संभावना नहीं है, तो उसके इस बयान ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। माना गया कि इसमें आईसीएमआर द्वारा दिए गए बयान में सुधार किया गया है।