स्कूलों में शौचालय तो हैं लेकिन ज्यादातर इस्तेमाल के लायक नहीं
- गैर सरकारी संगठनों के सर्वेक्षण से हुआ खुलासा
- यूपी के अमेठी, रायबरेली, अंबेडकर नगर के कई स्कूलों में शौचालय नहीं
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एक साल में देश के सभी स्कूलों में टॉयलेट बनाने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लक्ष्य को सरकार ने पूरा करने का दावा किया है । जबकि ताजा सर्वेक्षण बता रहे हैं कि टॉयलेट बने जरूर हैं लेकिन इनमें से कई का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है।
कुछ सरकारी सर्वेक्षणों के मुताबिक तैयार और इस्तेमाल करने लायक टॉयलेट की संख्या में भारी अंतर है।
मानव संसाधन विकास मंत्रालय की वेबसाइट के मुताबिक देशभर में 4,17,796 शौचालय बनाने का लक्ष्य रखा गया था जिसे शत प्रतिशत पूरा कर लिया गया है। लेकिन राष्ट्रीय मुक्त विद्यालय संस्थान की हालिया रिपोर्ट में 2014 तक अमेठी, रायबरेली व अंबेडकर नगर के कई स्कूलों में टॉयलेट न होने की बात की गई है।
देश के 300 स्कूलों में हुआ सर्वेक्षण
गैर सरकारी संगठन ‘एकाउंटिबिलिटी इनीशिएटिव’ द्वारा देश के 300 स्कूलों पर दिसंबर 2015 में किए गए सर्वेक्षण के मुताबिक निर्मित शौचालयों की संख्या और इस्तेमाल के लायक शौचालयों की संख्या के मामले में काफी अंतर देखने को मिला है।
सर्वेक्षण के आंकड़ों के मुताबिक 91 फीसदी लड़कियों के स्कूलों में टॉयलेट हैं लेकिन इनमें से 71 फीसदी ही इस्तेमाल के लायक हैं। लड़कों के 87 फीसदी स्कूलों में शौचालय हैं लेकिन केवल 67 फीसदी ही इस्तेमाल के लायक हैं।
अध्यापकों के लिए निर्मित शौचालयों के आंकड़ों पर गौर करें तो 34 फीसदी स्कूलों में से 28 फीसदी के ही टॉयलेट इस्तेमाल करने योग्य हैं। वहीं 27 फीसदी स्कूलों के साझा शौचालयों में से 18 फीसदी ही इस्तेमाल की स्थिति में हैं।