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सुप्रीम कोर्ट की दो टूक, कहा- मनमानी नहीं कर सकते स्कूल प्रबंधन

Sat, 18 Nov 2017 03:04 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 18 Nov 2017 03:04 AM IST
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School management can not be arbitrary says Supreme Court
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : SOCIAL MEDIA

 सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को दो टूक कहा कि स्कूल प्रबंधन अपने मन मुताबिक संस्थान को नहीं चला सकते। उन्हें जो भी अच्छा लगता है, वे वैसा नहीं कर सकते। कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि शिक्षा का अधिकार कानून प्री-स्कूल पर क्यों नहीं लागू होना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर दिसंबर में विस्तृत सुनवाई करेगा। 

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प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने पूछा कि शिक्षा का अधिकार (आरटीई) 6 से 14 साल के बच्चों के लिए है लेकिन उन बच्चों को इसके तहत क्यों नहीं लाना चाहिए जो प्री-स्कूल में दाखिला लेते हैं। पीठ ने कहा कि हमने गौर किया है कि आजकल छह से कम उम्र में ही बच्चों का स्कूल में दाखिला करा दिया जाता है।
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पढ़ें- साइबर कानून को मजबूत करना राज्यों की जिम्मेदारी: चीफ जस्टिस
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 प्रधान न्यायाधीश ने स्कूल प्रबंधन को स्पष्ट शब्दों में कहा कि आप अपना संस्थान अपने मन मुताबिक  नहींचला सकते हैं। प्री-स्कूलों को आरटीई के तहत लाने के सवाल पर स्कूलों का कहना था कि यह छह वर्ष से कम उम्र के बच्चों पर लागू नहीं होता। छह वर्ष से कम उम्र के बच्चों की देखरेख और उनकी शिक्षा की जिम्मेदारी राज्यों पर है। 

याचिका में दाखिलों में मनमानी का आरोप
सुप्रीम कोर्ट उस याचिका पर सुनवाई कर रहा है जिसमें स्कूलों द्वारा दाखिले में मनमानी करने का आरोप लगाया गया है। याचिकाकर्ता के वकील के मुताबिक, आरटीई के सेक्शन-13 के तहत स्क्रीनिंग प्रक्रिया के तहत दाखिले पर पाबंदी है।

 उन्होंने कहा कि आरटीई अधिनियम छह से 14 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों के लिए है लेकिन ज्यादातर स्कूल छह वर्ष से कम की उम्र में ही बच्चों का दाखिला (प्री-स्कूल क्लास) लेते हैं।


दिल्ली हाईकोर्ट ने स्क्रीनिंग प्रक्रिया पर रोक लगाई है
दिल्ली हाईकोर्ट ने प्री-स्कूल में ईडब्ल्यूएस के तहत होने वाले 25 फीसदी दाखिलों में तो आरटीई के प्रावधानों का अनुपालन करने का निर्देश देते हुए स्क्रीनिंग प्रक्रिया पर रोक लगाई है। हालांकि शेष 75 फीसदी दाखिलों को इस कानून से मुक्त रखा है। 

याचिकाकर्ता के मुताबिक, दाखिले लॉटरी सिस्टम से होने चाहिए लेकिन स्कूल वाले मनमानी करते हैं। वे अपने हिसाब से दाखिला देते हैं। 75 फीसदी दाखिले स्क्रीनिंग के तहत होते हैं।
 

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