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School Jobs Scam: आदेश न मानने पर हाईकोर्ट की मुख्य सचिव को फटकार, कहा- 2 मई तक फैसला नहीं तो करेंगे कार्रवाई

Tue, 23 Apr 2024 05:53 PM IST
मेघा झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: मेघा झा Updated Tue, 23 Apr 2024 05:53 PM IST
सार

कलकत्ता उच्च न्यायालय ने मुख्य सचिव को स्कूल भर्ती घोटाला मामले में सीबीआई को मुकदमा चलाने की मंजूरी देने न देने पर जमकर फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि अगर 2 मई तक निर्णय नहीं लिया जाएगा, तो कोर्ट की ओर से आदेश का उल्लंघन करने पर कार्रवाई की जाएगी।

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School Jobs Scam: HC angry on Chief Secretary for not obeying the order, said- we will take action
कलकत्ता हाई कोर्ट - फोटो : ANI

विस्तार

कलकत्ता उच्च न्यायालय ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव को स्कूल भर्ती घोटाला मामले में सीबीआई को मुकदमा चलाने की मंजूरी देने का फैसला न करने पर जमकर फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि अगर 2 मई तक सीबीआई को मंजूरी देने के मामले पर निर्णय नहीं लिया गया, तो कोर्ट की ओर से आदेश का उल्लंघन करने पर कार्रवाई की जाएगी।
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कलकत्ता हाई कोर्ट ने पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग पैनल द्वारा की गई स्कूल शिक्षक भर्ती रद्द कर दी है। इस मामले में 23,753 नौकरियां रद्द करने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद इन सभी शिक्षकों को चार हफ्ते में वेतन भी वापस करना होगा। इन सभी टीचर्स को ब्याज के साथ ये वापस लौटाना होगा। वहीं मंगलवार को पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव को हाईकोर्ट ने 2016 के स्कूल नौकरी मामले में सीबीआई द्वारा गिरफ्तार किए गए पूर्व लोक सेवकों के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी देने के लिए 23 अप्रैल तक का समय दिया था। लेकिन मुख्य सचिव ने अब तक इस आदेश का पालन नहीं किया। इस बात से नाराज हाईकोर्ट ने कहा अगली बार यदि मुख्य सचिव ने अदालत के आदेश का पालन नहीं किया तो उन पर कार्रवाई की जाएगी। 
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बता दें कि इस घोटाले में पूर्व शिक्षा राज्यमंत्री पार्थ चटर्जी, पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग के पूर्व सचिव अशोक साहा, पूर्व एसएससी अध्यक्ष सुबीरस भट्टाचार्य और एसएससी की सलाहकार समिति के पूर्व अध्यक्ष शांति प्रसाद सिन्हा को गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तार व्यक्तियों के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी का सीबीआई का आवेदन 2022 से लंबित है। न्यायमूर्ति गौरांग कंठ ने कहा कि निर्णय लेते समय आरोपी व्यक्तियों की स्थिति, अधिकार या शक्ति से डरना नहीं चाहिए। 
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मुख्य सचिव को उन्होंने कहा कि आप अपना निर्णय स्वतंत्र होकर ले सकते हैं।

दो सालों जो आरोपी हिरासत में हैं, उनके वकीलों ने प्रार्थना पत्र देकर उन्हें जमानत पर रिहा करने की मांग की थी, क्योंकि मुकदमे की मंजूरी के निर्णय में देरी की जा रही थी। 


यह देखते हुए कि इन व्यक्तियों के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी के लिए सीबीआई का आवेदन 2022 से लंबित है, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने मुख्य सचिव को उन आरोपी व्यक्तियों के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी पर निर्णय लेने का निर्देश दिया, जिन्हें दो साल पहले गिरफ्तार किया गया था। दो मई.

अदालत ने मुख्य सचिव से सवाल भी किया कि क्या आरोपी इतने महत्वपूर्ण हैं कि मंजूरी प्रक्रिया को डेढ़ साल तक रोका गया है।
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