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Fraud: ठगों ने बदला ईमेल ID, मोबाइल मैसेज भी किए ब्लॉक; बुजुर्ग महिला के खाते से 33 लाख उड़ाए, ऐसे हुआ खुलासा
Mon, 20 Jul 2026 03:49 PM IST
Pavan
अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
Published by: Pavan
Updated Mon, 20 Jul 2026 03:49 PM IST
सार
पुलिस के अनुसार, पीड़िता के स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और आईसीआईसीआई बैंक में तीन खाते हैं। 1 जनवरी में उन्होंने मोबाइल बैंकिंग ऐप देखा था, तब उनकी सभी फिक्स डिपॉजिट सुरक्षित थीं। आरोप है कि 10 से 28 जनवरी के बीच साइबर ठगों ने बैंकिंग प्रोफाइल में सेंध लगाकर खातों से जुड़ी ईमेल आईडी बदल दी।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
पुणे में साइबर ठगों ने 67 वर्षीय रिटायर्ड स्कूल शिक्षिका के साथ ऐसी ठगी की, जिसका उन्हें करीब छह महीने तक पता ही नहीं चला। आरोप है कि ठगों ने पहले महिला के बैंक खातों से जुड़ी ईमेल आईडी बदल दी और मोबाइल पर आने वाले बैंक मैसेज भी ब्लॉक कर दिए, ताकि खाते से रकम निकलने की कोई जानकारी उन्हें न मिले। इसके बाद फिक्स डिपॉजिट तोड़कर और कई ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के जरिए 33 लाख 31 हजार रुपए निकाल लिए। इस पूरी सेंधमारी का खुलासा तब हुआ, जब महिला इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने के दौरान अपना डिजिटल पोर्टफोलियो देख रही थीं।
पुलिस के अनुसार, पौड रोड निवासी पीड़िता ने 17 जुलाई को कोथरुड पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। उनके स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और आईसीआईसीआई बैंक में तीन खाते हैं। 1 जनवरी में उन्होंने मोबाइल बैंकिंग ऐप देखा था, तब उनकी सभी फिक्स डिपॉजिट सुरक्षित थीं। आरोप है कि 10 से 28 जनवरी के बीच साइबर ठगों ने बैंकिंग प्रोफाइल में सेंध लगाकर खातों से जुड़ी ईमेल आईडी बदल दी। इसके साथ ही बैंक से आने वाले जरूरी अलर्ट और मैसेज भी उन तक नहीं पहुंचने दिए। इसके बाद कई ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के जरिए पूरी रकम निकाल ली गई।
यह भी पढ़ें- छात्रों पर लाठी चार्ज-आंसू गैस क्यों?: कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने सरकार से पूछे सवाल, थरूर ने भी घेरा
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महिला को इस ठगी की भनक तक नहीं लगी। 1 जुलाई को जब वह इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने के लिए अपना डिजिटल पोर्टफोलियो देख रही थीं, तब पता चला कि उनकी सभी फिक्स डिपॉजिट समय से पहले तोड़ दी गई हैं और खातों से पूरी रकम निकल चुकी है। अगले दिन वह दोनों बैंकों की शाखाओं में पहुंचीं। बैंक अधिकारियों ने खातों की जांच के बाद पुष्टि की कि जनवरी में दो सप्ताह के भीतर ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के जरिए पूरी रकम निकाल ली गई थी।
महिला ने बैंक अधिकारियों को बताया कि उन्होंने कोई ट्रांजैक्शन नहीं किया और न ही खाते से रकम निकलने का कोई एसएमएस या ईमेल मिला। बैंक की जांच में सामने आया कि उनकी जानकारी और अनुमति के बिना खातों से जुड़ी ईमेल आईडी बदल दी गई थी, जिससे सभी बैंक अलर्ट दूसरे पते पर जाने लगे। इसी वजह से उन्हें खाते से रकम निकलने की जानकारी नहीं मिल सकी।
महिला ने 7 जुलाई को राष्ट्रीय साइबर शिकायत पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई थी। बाद में 17 जुलाई को पुलिस स्टेशन जाकर एफआईआर करवाई । शुरुआती जांच के बाद कोथरुड पुलिस ने अज्ञात साइबर ठगों के खिलाफ धोखाधड़ी और फर्जी पहचान का इस्तेमाल कर ठगी करने का मामला दर्ज किया है। जांच अधिकारियों का मानना है कि आरोपियों ने ट्रांजैक्शन से जुड़े मैसेज और ओटीपी भी बीच में रोकने की साजिश रची, ताकि पीड़िता को बैंक खातों में हुई सेंधमारी का पता न चल सके।
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पुलिस के अनुसार, पौड रोड निवासी पीड़िता ने 17 जुलाई को कोथरुड पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। उनके स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और आईसीआईसीआई बैंक में तीन खाते हैं। 1 जनवरी में उन्होंने मोबाइल बैंकिंग ऐप देखा था, तब उनकी सभी फिक्स डिपॉजिट सुरक्षित थीं। आरोप है कि 10 से 28 जनवरी के बीच साइबर ठगों ने बैंकिंग प्रोफाइल में सेंध लगाकर खातों से जुड़ी ईमेल आईडी बदल दी। इसके साथ ही बैंक से आने वाले जरूरी अलर्ट और मैसेज भी उन तक नहीं पहुंचने दिए। इसके बाद कई ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के जरिए पूरी रकम निकाल ली गई।
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महिला को इस ठगी की भनक तक नहीं लगी। 1 जुलाई को जब वह इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने के लिए अपना डिजिटल पोर्टफोलियो देख रही थीं, तब पता चला कि उनकी सभी फिक्स डिपॉजिट समय से पहले तोड़ दी गई हैं और खातों से पूरी रकम निकल चुकी है। अगले दिन वह दोनों बैंकों की शाखाओं में पहुंचीं। बैंक अधिकारियों ने खातों की जांच के बाद पुष्टि की कि जनवरी में दो सप्ताह के भीतर ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के जरिए पूरी रकम निकाल ली गई थी।
महिला ने बैंक अधिकारियों को बताया कि उन्होंने कोई ट्रांजैक्शन नहीं किया और न ही खाते से रकम निकलने का कोई एसएमएस या ईमेल मिला। बैंक की जांच में सामने आया कि उनकी जानकारी और अनुमति के बिना खातों से जुड़ी ईमेल आईडी बदल दी गई थी, जिससे सभी बैंक अलर्ट दूसरे पते पर जाने लगे। इसी वजह से उन्हें खाते से रकम निकलने की जानकारी नहीं मिल सकी।
महिला ने 7 जुलाई को राष्ट्रीय साइबर शिकायत पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई थी। बाद में 17 जुलाई को पुलिस स्टेशन जाकर एफआईआर करवाई । शुरुआती जांच के बाद कोथरुड पुलिस ने अज्ञात साइबर ठगों के खिलाफ धोखाधड़ी और फर्जी पहचान का इस्तेमाल कर ठगी करने का मामला दर्ज किया है। जांच अधिकारियों का मानना है कि आरोपियों ने ट्रांजैक्शन से जुड़े मैसेज और ओटीपी भी बीच में रोकने की साजिश रची, ताकि पीड़िता को बैंक खातों में हुई सेंधमारी का पता न चल सके।