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SC: 'पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने में विफल होने पर होगी अवमानना कार्रवाई', NCR राज्यों को 'सुप्रीम' निर्देश

Tue, 06 May 2025 04:22 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: पवन पांडेय Updated Tue, 06 May 2025 04:22 PM IST
सार

देश के सर्वोच्च न्यायालय ने एनसीआर राज्यों को सख्त निर्देश दिया है, कि अगर वे सभी पटाखों पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाने में विफल रहते हैं तो उन पर अवमानना की कार्रवाई होगी। इस दौरान कोर्ट ने ग्रीन पटाखों पर भी राहत नहीं दी है।

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SC warns contempt action if NCR states fail to implement complete curb on crackers, News in hindi
सुप्रीम कोर्ट (फाइल) - फोटो : ANI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा की सरकारों को सख्त चेतावनी दी है कि वे नेशनल कैपिटल रीजन (एनसीआर) में पटाखों पर पूरी तरह रोक लगाएं। अदालत ने साफ कहा कि अगर आदेश का पालन नहीं हुआ, तो जिम्मेदार अफसरों और संस्थाओं पर अदालत की अवमानना का मामला चलेगा।
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ईपीए कानून के तहत कार्रवाई का निर्देश
जस्टिस अभय एस. ओका और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने कहा कि राज्यों को पर्यावरण संरक्षण अधिनियम की धारा 5 के तहत निर्देश जारी कर रोक लगानी होगी। इसमें पटाखों का उत्पादन, बिक्री, भंडारण और ऑनलाइन डिलीवरी भी पूरी तरह बंद करने को कहा गया है।
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सख्त निगरानी और व्यापक प्रचार
कोर्ट ने राज्यों से कहा है कि वे सख्ती से इस आदेश को लागू करें और इसके लिए एक विशेष निगरानी तंत्र बनाएं। साथ ही, पटाखों की रोक और इसके उल्लंघन पर मिलने वाली सजा के बारे में जनता को बड़े पैमाने पर जानकारी दें। कोर्ट ने यह भी कहा कि पटाखों पर सिर्फ दीवाली के समय रोक लगाने से कोई फायदा नहीं होगा, क्योंकि लोग पहले ही खरीदकर जमा कर सकते हैं। इसलिए यह रोक साल भर लागू रहनी चाहिए।

ग्रीन पटाखों पर भी राहत नहीं
अदालत ने अप्रैल में साफ कर दिया था कि दिल्ली-एनसीआर में पटाखों पर लगी रोक में कोई ढील नहीं दी जाएगी। कोर्ट ने कहा कि जब तक यह साबित नहीं होता कि ग्रीन पटाखों से होने वाला प्रदूषण बेहद कम है, तब तक कोई छूट नहीं मिलेगी।


दिल्ली पहले से लगा चुकी है सालभर का बैन
दिसंबर 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने यूपी और हरियाणा को भी दिल्ली की तरह सालभर का बैन लगाने का आदेश दिया था। कोर्ट ने कहा था कि रोक का असर तभी दिखेगा जब एनसीआर के सभी राज्य मिलकर इसे लागू करेंगे। कोर्ट ने यह भी कहा कि दिल्ली और एनसीआर में वायु प्रदूषण लंबे समय तक खतरनाक स्तर पर रहा है। इसका सबसे ज्यादा असर उन लोगों पर पड़ता है, जो सड़कों पर काम करते हैं और जिनके पास एयर प्यूरीफायर लगाने की सुविधा नहीं है।

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1985 से चल रहा है मामला
सुप्रीम कोर्ट एनसीआर में प्रदूषण पर यह सुनवाई 1985 में पर्यावरण कार्यकर्ता एम.सी. मेहता की याचिका पर कर रहा है। अब कोर्ट ने सख्त तेवर दिखाते हुए कहा कि आदेश का उल्लंघन अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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