{"_id":"6894d1491fe09fd8600fb250","slug":"sc-urge-centre-iaf-to-liberalise-definition-of-mother-to-include-step-mother-for-family-pension-2025-08-07","type":"story","status":"publish","title_hn":"SC: 'परिवार पेंशन जैसे लाभ में मां की परिभाषा में सौतेली मां को भी शामिल करें', केंद्र और वायुसेना को निर्देश","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
SC: 'परिवार पेंशन जैसे लाभ में मां की परिभाषा में सौतेली मां को भी शामिल करें', केंद्र और वायुसेना को निर्देश
Thu, 07 Aug 2025 09:46 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Thu, 07 Aug 2025 09:46 PM IST
सार
SC: सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सामाजिक योजनाओं में 'मां' की परिभाषा को उदार बनाकर सौतेली मां को भी लाभों का हकदार माना जाना चाहिए। कोर्ट ने केंद्र सरकार और भारतीय वायुसेना से अपने नियमों में संशोधन कर सौतेली मां को परिवार पेंशन जैसे लाभ देने पर विचार करने को कहा। एक महिला की याचिका पर कोर्ट ने यह टिप्पणी की, जिसने अपने सौतेले बेटे की परवरिश की थी और अब बेटे की मृत्यु के बाद परिवार पेंशन मांग रही है।
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट (फाइल)
- फोटो : एएनआई
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि समाज कल्याण की योजनाओं, खासकर परिवार पेंशन जैसे लाभों के मामलों में 'मां' शब्द की व्याख्या उदारतापूर्वक की जानी चाहिए ताकि सौतेली मां को भी इन लाभों का हकदार माना जा सके। जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस उज्जल भुइयां और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की बेंच ने केंद्र सरकार और भारतीय वायुसेना से कहा कि उनके नियमों में 'मां' की जो परिभाषा दी गई है, उसमें संशोधन कर सौतेली मां को भी शामिल किया जाना चाहिए।
पीठ ने कहा, 'हमें 'मां' शब्द को उदार बनाना होगा। इसमें सौतेली मां को भी शामिल किया जाना चाहिए, खासकर तब जब परिवार पेंशन जैसी सामाजिक योजनाओं के लाभ की बात हो। सौतेली मां वास्तव में मां ही होती है।'
ये भी पढ़ें: 'सीजेआई केवल संदेशवाहक भर नहीं, उन पर न्याय व्यवस्था को बचाने की जिम्मेदारी', सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट एक महिला की याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसने अपने सौतेले बेटे को पाला था, जब उसकी जैविक मां की मृत्यु हो गई थी। अब वह अपने बेटे की मृत्यु के बाद परिवार पेंशन की हकदार बनने की मांग कर रही है। सुनवाई के दौरान जस्टिस सूर्यकांत ने केंद्र सरकार के वकील से पूछा, अगर एक महीने के बच्चे की मां की मृत्यु हो जाती है और पिता दूसरी शादी करता है, तो क्या सौतेली मां को मां नहीं माना जाएगा?
जस्टिस सूर्यकांत ने आगे कहा, कानून में आप भले ही उसे सौतेली मां कहें, लेकिन वह वास्तव में एक मां की भूमिका निभा रही है। पहले दिन से ही उसने उस बच्चे के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। केंद्र सरकार के वकील ने हालांकि भारतीय वायुसेना के नियमों का हवाला देते हुए कहा कि इन नियमों में 'मां' की परिभाषा में 'सौतेली मां' शामिल नहीं है।
इस पर जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि केंद्र सरकार को सौतेली मां के पेंशन या अन्य लाभों के दावे को स्वीकार करने के लिए लचीला दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा, इसके लिए इस परिभाषा को उदार करना जरूरी है। इससे पहले अप्रैल महीने में भी सुप्रीम कोर्ट ने यह कहा था कि वह इस सवाल पर विचार करेगा कि क्या वायुसेना के नियमों के तहत सौतेली मां को परिवार पेंशन मिल सकती है। कोर्ट ने तब यह भी कहा था कि 'मां' एक बहुत व्यापक शब्द है।
ये भी पढ़ें: हाईकोर्ट जज के मामले में दोबारा सुनवाई करेगा शीर्ष कोर्ट, दीवानी केस में आपराधिक कार्रवाई को दी थी मंजूरी
कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया था कि जब एक महिला छह साल की उम्र से एक बच्चे की परवरिश कर रही है, तो उसे सिर्फ इसलिए पेंशन से वंचित कैसे किया जा सकता है क्योंकि वह उसकी जैविक मां नहीं है। सुनवाई के दौरान भारतीय वायुसेना के वकील ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के कुछ पुराने फैसलों में 'सौतेली मां' की व्याख्या की गई है और वायुसेना के नियमों में यह स्पष्ट है कि किन लोगों को परिवार पेंशन मिल सकती है।
महिला ने 10 दिसंबर 2021 को सशस्त्र बल न्यायाधिकरण के फैसले को चुनौती दी है, जिसमें उसे परिवार पेंशन से वंचित कर दिया गया था। महिला के बेटे की वायुसेना में सेवा के दौरान मृत्यु हो गई थी। 19 जुलाई 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने महिला की याचिका पर सुनवाई करने का निर्णय लिया था और केंद्र सरकार तथा भारतीय वायुसेना को नोटिस जारी किया था।
विज्ञापन
पीठ ने कहा, 'हमें 'मां' शब्द को उदार बनाना होगा। इसमें सौतेली मां को भी शामिल किया जाना चाहिए, खासकर तब जब परिवार पेंशन जैसी सामाजिक योजनाओं के लाभ की बात हो। सौतेली मां वास्तव में मां ही होती है।'
विज्ञापन
ये भी पढ़ें: 'सीजेआई केवल संदेशवाहक भर नहीं, उन पर न्याय व्यवस्था को बचाने की जिम्मेदारी', सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट एक महिला की याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसने अपने सौतेले बेटे को पाला था, जब उसकी जैविक मां की मृत्यु हो गई थी। अब वह अपने बेटे की मृत्यु के बाद परिवार पेंशन की हकदार बनने की मांग कर रही है। सुनवाई के दौरान जस्टिस सूर्यकांत ने केंद्र सरकार के वकील से पूछा, अगर एक महीने के बच्चे की मां की मृत्यु हो जाती है और पिता दूसरी शादी करता है, तो क्या सौतेली मां को मां नहीं माना जाएगा?
जस्टिस सूर्यकांत ने आगे कहा, कानून में आप भले ही उसे सौतेली मां कहें, लेकिन वह वास्तव में एक मां की भूमिका निभा रही है। पहले दिन से ही उसने उस बच्चे के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। केंद्र सरकार के वकील ने हालांकि भारतीय वायुसेना के नियमों का हवाला देते हुए कहा कि इन नियमों में 'मां' की परिभाषा में 'सौतेली मां' शामिल नहीं है।
इस पर जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि केंद्र सरकार को सौतेली मां के पेंशन या अन्य लाभों के दावे को स्वीकार करने के लिए लचीला दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा, इसके लिए इस परिभाषा को उदार करना जरूरी है। इससे पहले अप्रैल महीने में भी सुप्रीम कोर्ट ने यह कहा था कि वह इस सवाल पर विचार करेगा कि क्या वायुसेना के नियमों के तहत सौतेली मां को परिवार पेंशन मिल सकती है। कोर्ट ने तब यह भी कहा था कि 'मां' एक बहुत व्यापक शब्द है।
ये भी पढ़ें: हाईकोर्ट जज के मामले में दोबारा सुनवाई करेगा शीर्ष कोर्ट, दीवानी केस में आपराधिक कार्रवाई को दी थी मंजूरी
कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया था कि जब एक महिला छह साल की उम्र से एक बच्चे की परवरिश कर रही है, तो उसे सिर्फ इसलिए पेंशन से वंचित कैसे किया जा सकता है क्योंकि वह उसकी जैविक मां नहीं है। सुनवाई के दौरान भारतीय वायुसेना के वकील ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के कुछ पुराने फैसलों में 'सौतेली मां' की व्याख्या की गई है और वायुसेना के नियमों में यह स्पष्ट है कि किन लोगों को परिवार पेंशन मिल सकती है।
महिला ने 10 दिसंबर 2021 को सशस्त्र बल न्यायाधिकरण के फैसले को चुनौती दी है, जिसमें उसे परिवार पेंशन से वंचित कर दिया गया था। महिला के बेटे की वायुसेना में सेवा के दौरान मृत्यु हो गई थी। 19 जुलाई 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने महिला की याचिका पर सुनवाई करने का निर्णय लिया था और केंद्र सरकार तथा भारतीय वायुसेना को नोटिस जारी किया था।