SC Updates: दिल्ली में सेवाओं पर नियंत्रण से जुड़े कानून के खिलाफ जल्द सुनवाई की मांग, CJI ने कही यह बात
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दिल्ली सरकार ने सेवाओं पर नियंत्रण को लेकर केंद्रीय कानून के खिलाफं अपनी याचिका को पांच-न्यायाधीशों वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ के सामने शीघ्र सूचीबद्ध करने की अपील की। भारत के प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने आश्वासन दिया कि वह याचिका को सूचीबद्ध करने के दिल्ली सरकार के अनुरोध पर गौर करेंगे।
आम आदमी पार्टी (आप) सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी ने प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ से आग्रह किया कि पूरा प्रशासन ठप हो गया है और मामले की सुनवाई किए जाने की जरूरत है। प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि फिलहाल नौ न्यायाधीशों की पीठ के समक्ष एक मामले की सुनवाई जारी है और वह इस अनुरोध पर विचार करेंगे।
वर्तमान में प्रधान न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली नौ-न्यायाधीशों की पीठ यह जटिल कानूनी सवाल उठाने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है कि क्या निजी संपत्तियों को संविधान के उस अनुच्छेद 39 (बी) के तहत ‘समुदाय के भौतिक संसाधन’ माना जा सकता है, जो राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांतों का हिस्सा है।
इससे पहले शीर्ष अदालत ने केंद्र के पिछले साल 19 मई के उस अध्यादेश को चुनौती देने वाली दिल्ली सरकार की याचिका को पांच न्यायाधीशों वाली संविधान पीठ के पास भेज दिया था, जिसने शहर की निर्वाचित व्यवस्था से सेवाओं पर नियंत्रण छीन लिया था। इसके कारण सत्ता के दो केंद्रों के बीच एक नया विवाद शुरू हो गया था। बाद में इस मामले पर अध्यादेश को केंद्रीय कानून में बदल दिया गया।
NOTA को लेकर दायर याचिका पर ECI को नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने उस याचिका पर चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है, जिसमें ऐसे नियम बनाने के निर्देश देने की मांग की गई है कि यदि नोटा को बहुमत मिलता है, तो विशेष निर्वाचन क्षेत्र में हुए चुनाव को शून्य घोषित कर दिया जाएगा। ऐसे निर्वाचन क्षेत्र में नए सिरे से चुनाव कराया जाएगा। याचिका में यह कहते हुए नियम बनाने की भी मांग की गई है कि नोटा से कम वोट पाने वाले उम्मीदवारों को 5 साल के लिए सभी चुनाव लड़ने से रोक दिया जाएगा। याचिका में यह भी मांग की गई है कि ऐसी परिस्थिति में नोटा को काल्पनिक उम्मीदवार मानकर उचित और कुशल प्रचार सुनिश्चित किया जाएगा।