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लगातार केस बनाकर हिरासत में रखना सही या गलत?: याचिका पर सुप्रीम कोर्ट करेगा विचार, एमपी सरकार को भेजा नोटिस

Thu, 02 Jul 2026 08:08 PM IST
निर्मल कांत पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Thu, 02 Jul 2026 08:08 PM IST
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SC to examine if habeas corpus petition maintainable against successive arrests
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
सुप्रीम कोर्ट ने इस कानूनी सवाल पर विचार करने पर सहमति जताई है कि क्या लगातार गिरफ्तारियों के कारण किसी आरोपी की जारी हिरासत को चुनौती देने वाली हैबियस कॉर्पस याचिका सुनवाई योग्य है या नहीं।
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जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस शील नागू की पीठ ने मध्य प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया है। यह नोटिस एक गैंगस्टर की याचिका पर जारी किया गया है, जो अगस्त 2021 से हिरासत में है, जबकि उसे गिरफ्तारी के लिखित आधार नहीं दिए गए हैं।
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मध्य प्रदेश सरकार को नोटिस जारी
शीर्ष कोर्ट ने हाजी अब्दुल रज्जाक की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई की। याचिका  में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें उनकी हैबियस कॉर्पस याचिका खारिज कर दी गई थी। हाईकोर्ट ने कहा था कि उनकी हिरासत को अवैध नहीं माना जा सकता, क्योंकि वर्तमान में उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों के कारण वह हिरासत में हैं।
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रज्जाक की ओर से वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ दवे पेश हुए। उन्होंने हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए कहा कि गिरफ्तारी के आधार उन्हें लिखित रूप में नहीं दिए गए।

एएसजी ने हैबियस कॉर्पस याचिका की स्वीकार्यता पर उठाया सवाल
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू मध्य प्रदेश सरकार की ओर से पेश हुए। उन्होंने हैबियस कॉर्पस याचिका की स्वीकार्यता पर सवाल उठाया और कहा कि हाईकोर्ट ने याचिका सही तरीके से खारिज की थी।

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हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में क्या कहा गया था?
रज्जाक ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए कहा था कि पुलिस ने बार-बार राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) और लगातार नए आपराधिक मामलों का इस्तेमाल करके उन्हें जेल में रखा है। याचिका में कहा गया कि एनएसए के तहत जारी तीन अलग-अलग हिरासत आदेशों को सलाहकार बोर्ड की मंजूरी न मिलने के कारण रद्द कर दिया गया था।

याचिकाकर्ता ने कहा कि जब भी उन्हें आपराधिक मामलों में राहत मिलती है, तब उनके खिलाफ नए मामले दर्ज कर लिए जाते हैं, ताकि उन्हें लगातार हिरासत में रखा जा सके।
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