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SC: शीर्ष अदालत ने मद्रास HC के आदेश पर लगाई रोक,  AIADMK के सांसद रवींद्रनाथ का चुनाव अवैध घोषित किया था

Sat, 05 Aug 2023 02:15 PM IST
देव कश्यप पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली। Published by: देव कश्यप Updated Sat, 05 Aug 2023 02:15 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने शुक्रवार को पारित आदेश में कहा, सुनवाई के बीच मद्रास उच्च न्यायालय द्वारा पारित छह जुलाई, 2023 के आक्षेपित निर्णय (Impugned Judgment) और आदेश के क्रियान्वयन पर रोक रहेगी। परिणामस्वरूप, अपीलकर्ता (पी रवींद्रनाथ) को अगले आदेश तक सभी इरादों और उद्देश्यों के लिए 17वीं लोकसभा के संसद सदस्य के रूप में बने रहने की अनुमति दी जाएगी।

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SC stays Madras HC order that declared lone AIADMK MP P Ravindhranath election invalid
सुप्रीम कोर्ट। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट से एआईएडीएमके के एकमात्र सांसद पी रवींद्रनाथ को राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने मद्रास उच्च न्यायालय के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें तमिलनाडु के थेनी संसदीय क्षेत्र से बर्खास्त अन्नाद्रमुक सांसद पी रवींद्रनाथ के 2019 के चुनाव को "अमान्य और शून्य" घोषित कर दिया गया था। न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की पीठ ने उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ रवींद्रनाथ द्वारा दायर अपील को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया और पी मिलानी (P Milany) को नोटिस जारी किया। मिलानी ने थेनी निर्वाचन क्षेत्र से रवींद्रनाथ के चुनाव को चुनौती देने वाली याचिका दायर की थी।

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पीठ ने शुक्रवार को पारित अपने आदेश में कहा, सुनवाई के बीच मद्रास उच्च न्यायालय द्वारा पारित छह जुलाई, 2023 के आक्षेपित निर्णय (Impugned Judgment) और आदेश के क्रियान्वयन पर रोक रहेगी। परिणामस्वरूप, अपीलकर्ता (पी रवींद्रनाथ) को अगले आदेश तक सभी इरादों और उद्देश्यों के लिए 17वीं लोकसभा के संसद सदस्य के रूप में बने रहने की अनुमति दी जाएगी।
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कौन हैं रवींद्रनाथ?
रवींद्रनाथ अन्नाद्रमुक के अपदस्थ नेता और तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री ओ पन्नीरसेल्वम के बेटे हैं। मिलानी ने इससे पहले उच्च न्यायालय के समक्ष आरोप लगाया था कि रवींद्रनाथ ने चुनाव के लिए अपना नामांकन दाखिल करते समय विभिन्न तथ्यों को छुपाया था, जिसमें उनकी और उनके परिवार के सदस्यों की चल और अचल संपत्ति और देनदारियों का विवरण भी शामिल था। उन्होंने अपनी चुनाव याचिका में शिकायत की थी कि तथ्यों को दबाने से चुनाव पर वास्तविक रूप से असर पड़ा।

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मद्रास हाईकोर्ट ने क्या सुनाया था फैसला?
मद्रास उच्च न्यायालय ने छह जुलाई को कहा था, बेशक इस मामले में जैसा कि रिटर्निंग अधिकारी द्वारा कहा गया है, तीसरे प्रतिवादी (रवींद्रनाथ) का नामांकन रिटर्निंग अधिकारी द्वारा जांच की तारीख पर स्वीकार कर लिया गया था। जांच की तारीख पर, एक तीसरे पक्ष अरप्पोर इयक्कम द्वारा उठाई गई आपत्ति एक वैध आपत्ति है और गैर-प्रकटीकरण या गलत प्रकटीकरण को तीसरे प्रतिवादी ने वैधानिक प्रावधानों और रिटर्निंग अधिकारी के लिए हैंडबुक में दिए गए दिशा-निर्देशों के विपरीत जांच के बाद एक हलफनामा प्रस्तुत करके स्वीकार किया है। इससे पता चलता है कि रिटर्निंग ऑफिसर, जिसे नामांकन की जांच की तारीख पर आपत्ति पर विचार करना था, वह ऐसा करने में विफल रहा और बिना किसी स्पष्टीकरण या सुधार के नामांकन स्वीकार कर लिया। परिणामस्वरूप, इस अदालत का मानना है कि तीसरे प्रतिवादी का नामांकन रिटर्निंग अधिकारी द्वारा अनुचित तरीके से स्वीकार कर लिया गया।


रवींद्रनाथ ने तर्क दिया था कि तथ्यों को छुपाने से चुनाव के परिणाम पर कोई खास असर नहीं पड़ा। इसके बाद उच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया, तथ्यों को छुपाने प्रमाणित है। परिणामस्वरूप, इस अदालत का मानना है कि निर्वाचित उम्मीदवार का नामांकन अनुचित तरीके से स्वीकार किया गया था। सभी मुद्दों पर उपरोक्त निष्कर्षों के मद्देनजर, इस अदालत को चुनाव याचिका की अनुमति देनी होगी और तीसरे प्रतिवादी या निर्वाचित उम्मीदवार के चुनाव को शून्य घोषित करना होगा।

पिछले साल जुलाई में अन्नाद्रमुक के तत्कालीन अंतरिम महासचिव के रूप में उनके चुनाव के तुरंत बाद पार्टी प्रमुख एडप्पादी के पलानीस्वामी ने अपने प्रतिद्वंद्वी पन्नीरसेल्वम और रवींद्रनाथ सहित अन्य को पार्टी से निष्कासित कर दिया था। पलानीस्वामी ने बाद में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखा था कि रवींद्रनाथ अब अन्नाद्रमुक के साथ नहीं हैं और उन्हें पार्टी का प्रतिनिधित्व करने वाला सांसद नहीं माना जाना चाहिए।


इसके बाद, अन्नाद्रमुक के पास कोई लोकसभा सदस्य नहीं बचा है क्योंकि 2019 में रवींद्रनाथ एकमात्र पार्टी के सफल उम्मीदवार थे, जब द्रमुक और उसके सहयोगियों ने चुनाव जीता था। रवींद्रनाथ ने कांग्रेस के दिग्गज नेता ईवीकेएस एलंगोवन ( EVKS Elangovan) को हराया था।

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