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एआईसीटीई को सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फटकार
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
Updated Tue, 31 May 2016 08:41 PM IST
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सुप्रीम कोर्ट्र
- फोटो : Reuters
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देश भर के टैक्निकल कॉलेजों को सालाना अप्रूवल देने पर देरी पर सुप्रीम कोर्ट ने ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (एआईसीटीई) को जमकर फटकार लगाई है। शीर्ष अदालत ने एआईसीटीई से कहा वह उन्हें हल्के में न लें, हमें अपने आदेश का पालन करवाना आता है। शीर्ष अदालत ने वर्ष 2012 में
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सालाना अप्रूवल के लिए समय सीमा निर्धारित की थी।
वास्तव में उत्तर प्रदेश के एपीजे अब्दुल कलाम टेक्निकल यूनिवर्सिटी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा था उनके टेक्निकल कॉलेजों को एआईसीटीई ने नौ मई को सलाना अप्रूवल दिया, जबकि यह काम 10 अप्रैल तक होना था। याचिका में कहा गया था कि अगर अप्रूवल 10 अप्रैल तक मिल जाता तब 15 मई तक सारी प्रक्रियाएं पूरी हो जाती, लेकिन चूंकि उन्होंने नौ मई को अप्रूवल मिलने की जानकारी मिली, लिहाजा सभी प्रक्रिया को पूरी करने के लिए और वक्त दिया जाए। मालूम हो कि उत्तर प्रदेश के 612 इंजीनियरिंग और पॉलीटेक्निक कॉलेजों की नोडल एजेंसी डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम यूनिवर्सिटी है।
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न्यायमूर्ति पीसी पंत और न्यायमूर्ति अमिताभ रॉय की अवकाशकालीन पीठ ने उनकेआग्रह को स्वीकार करते हुए यूनिवर्सिटी को 10 जून तक का वक्त दे दिया लेकिन एआईसीटीआई की जमकर क्लास लगाई। पीठ ने एआईसीटीई को दोटूक कहा 'हमारे आदेश को अपने हिसाब से उलटा-सीधा करने की कोशिश न की जाए। हम यहां बेकार नहीं बैठे हुए हैं। पीठ ने एआईसीटीसी से कहा कि हम कड़ा रुख अख्तियार कर सकते हैं। हम आपके खिलाफ अवमानना नोटिस जारी कर सकते हैं। अवकाशकालीन पीठ ने एआईसीटीई केउदासीन रवैये को फटकार लगाते हुए कहा कि यूपी में कॉलेज नहीं हैं जहां 612 कॉलेजों केछात्रों को दाखिला दिया जा सके।
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पीठ ने एआईसीटीई से कहा कि आप देखें कि आपने कॉलेज और छात्रों के साथ क्या किया। पीठ ने एआईसीटीई को एक हफ्ते के भीतर यह बताने के लिए कहा है कि आखिर उसने अदालती आदेश का क्यों नहीं पालन किया। एआईसीटीई को बताने के लिए कहा गया है कि यूपी के612 कॉलेजों को अप्रूवल देने में क्यों देरी हुई। पीठ ने यह भी कहा कि वह जुर्माना भी लगा सकती है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि डेडलाइन में छूट सिर्फ मौजूदा मामले के लिए कहा गया है। यह छूट को अपवाद केतौर पर देखा जाएगा। वर्ष 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि 10 अप्रैल तक सालाना अप्रूवल के बारे में जानकारी देना जरूरी है। अगर इसे लेकर किसी को आपत्ति है तो वह अपील कर सकता है। 30 अप्रैल तक आपत्तियों का निपटारा करना अनिवार्य होगा।