फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   SC sets aside HC order asking man to pay Rs 10 lakh to wife as condition for pre-arrest bail in dowry case

दहेज प्रताड़नाः सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड हाई कोर्ट का आदेश खारिज किया, पति को दिया था 10 लाख भुगतान का आदेश

Thu, 27 Oct 2022 09:18 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amit Mandal Updated Thu, 27 Oct 2022 09:18 PM IST
सार

पीठ ने कहा कि उच्च न्यायालय द्वारा अपीलकर्ता (पति) को गिरफ्तारी पूर्व जमानत का लाभ उठाने के लिए 10 लाख रुपये का डिमांड ड्राफ्ट जमा करने के लिए कहने का कोई औचित्य नहीं है।
 

विज्ञापन
SC sets aside HC order asking man to pay Rs 10 lakh to wife as condition for pre-arrest bail in dowry case
Supreme Court - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड उच्च न्यायालय के उस आदेश को खारिज कर दिया है जिसमें एक व्यक्ति को दहेज प्रताड़ना के एक मामले में अग्रिम जमानत हासिल करने की शर्त के रूप में अपनी अलग हुई पत्नी को 10 लाख रुपये का भुगतान करने को कहा गया था। उच्च न्यायालय ने 4 और 5 मार्च, 2021 को अपने आदेश में पति को अपनी पत्नी के पक्ष में अंतरिम पीड़ित मुआवजे के रूप में 10 लाख रुपये का डिमांड ड्राफ्ट जमा करने का निर्देश दिया था। न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी और न्यायमूर्ति सीटी रवि कुमार की पीठ ने कहा कि उच्च न्यायालय द्वारा अपीलकर्ता (पति) को गिरफ्तारी पूर्व जमानत का लाभ उठाने के लिए 10 लाख रुपये का डिमांड ड्राफ्ट जमा करने के लिए कहने का कोई औचित्य नहीं है।

विज्ञापन


शीर्ष अदालत ने कहा कि मामला वास्तव में जोड़े के बीच एक वैवाहिक विवाद है और उनकी शादी 11 जून, 2015 को हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार हुई थी, लेकिन बाद में मतभेदों के कारण पति द्वारा 8 जुलाई 2016 को एक आवेदन दायर किया गया था जिसमें विवाह खत्म करने की मांग की गई थी। 
विज्ञापन


पत्नी ने इस बीच 27 जुलाई, 2017 को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष अपने पति के खिलाफ एक आपराधिक शिकायत भी दर्ज कराई, जिसे बाद में आईपीसी और दहेज निषेध अधिनियम के तहत अपराधों के लिए 22 फरवरी, 2018 को प्राथमिकी में बदल दिया गया। पीठ ने 18 अक्टूबर को अपने आदेश में कहा कि असंज्ञेय अपराध होने के कारण अपीलकर्ता (पति) ने गिरफ्तारी से पहले जमानत की मांग करते हुए एक आवेदन दायर करके अदालत का दरवाजा खटखटाया। इसने कहा कि उच्च न्यायालय ने इस आधार पर गिरफ्तारी से पहले जमानत दी कि पति अपनी जमानत अर्जी में बताए अनुसार वैवाहिक जीवन फिर से शुरू करेगा। पीठ ने कहा कि जब जमीनी हकीकत ऐसी है कि इसमें शामिल पक्ष वैवाहिक कलह में हैं, तो वैवाहिक अधिकारों को बहाल करने के लिए परस्पर कार्यवाही शुरू करना अन्यथा संभव नहीं है।  

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed