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शादी को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ठहराया अवैध, फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची नाबालिग

Mon, 23 Sep 2019 01:16 PM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Sneha Baluni Updated Mon, 23 Sep 2019 01:16 PM IST
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SC seeks presence of minor girl from UP to adjudicate plea filed by her challenging HC order
सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो) - फोटो : social media

उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को इस्लामी कानून के तहत निकाह करने वाली मुस्लिम युवती को व्यस्क होने तक पति के साथ रहने का अधिकार नहीं है वाले मसले पर सुनवाई की। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने लड़की के निकाह को अवैध करार दिया है क्योंकि वह 16 साल की है। इसी आदेश को लड़की ने शीर्ष अदालत में चुनौती दी है। 

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जिसपर अदालत ने एक अक्तूबर को लड़की, उसके पिता और पति को बुलाया है ताकि फैसला सुनाया जा सके। न्यायमूर्ति एनवी रमन्ना की पीठ ने कहा कि वह नाबालिग लड़की, उसके पिता और पति के साथ बातचीत करेंगे। उन्होंने रजिस्ट्री से उस अनुरोध के बारे में पूछा जिसमें एम्स की एक महिला मनोरोग चिकित्सक को लड़की से बात करने के लिए बुलाया जाएगा।
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नाबालिग युवती ने अपनी मर्जी से पसंद के लड़के के साथ शादी की थी। अहम बात है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने न केवल इस निकाह को अवैध ठहरा दिया बल्कि युवती को नारी निकेतन में रखने के निर्णय को भी सही ठहराया था। 

क्या है मामला

उत्तर प्रदेश के बहराइच की रहने वाली 16 वर्षीय फातिमा ने गत 22 जून को अपनी मर्जी से एक मुस्लिम युवक के साथ निकाह किया था। इस जोड़े ने मुस्लिम कानून के तहत निकाह की तमाम शर्तों को पूरा किया था। इसके बाद युवती के पिता की शिकायत पर लड़के के खिलाफ अपरहरण सहित अन्य अपराधों के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। 

मजिस्ट्रेट के समक्ष अपनी मर्जी के साथ निकाह करने व उसके साथ रहने की इच्छा के बावजूद उसे व्यस्क होने तक नारी निकेतन भेज दिया गया। इसके बाद उसके पति ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में हैबियस कॉरपस याचिका दायर की, लेकिन वह खारिज हो गई। हाईकोर्ट ने युवती को नारी निकेतन में रखने के फैसले को तो सही ठहराया ही और शादी को भी शून्य करार दे दिया।


शीर्ष अदालत में दायर याचिका में कहा गया कि मुस्लिम कानून के तहत, रजोस्वला की उम्र (15 वर्ष) की युवती को अपनी मर्जी से निकाह करने का अधिकार है। युवती के मुताबिक, निकाह की तमाम शर्तों को पूरा करने के बाद भी उसे पति के साथ रहने की इजाजत न देना और शादी को शून्य करार देना गैरकानूनी है। 

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