फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   SC seeks Centre response in 8 weeks on plea seeking restoration of statehood to Jammu and Kashmir

SC: जम्मू-कश्मीर राज्य के दर्जे पर शीर्ष कोर्ट ने दिया पहलगाम का हवाला; कहा- जमीनी हकीकत नजरअंदाज नहीं कर सकते

Thu, 14 Aug 2025 11:34 AM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Thu, 14 Aug 2025 11:34 AM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग वाली एक याचिका पर केंद्र से जवाब मांगा। कोर्ट ने कहा कि हाल ही में हुई पहलगाम की घटना सहित जमीनी हकीकत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

विज्ञापन
SC seeks Centre response in 8 weeks on plea seeking restoration of statehood to Jammu and Kashmir
Supreme Court - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग वाली एक याचिका पर केंद्र से जवाब मांगा। भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) बीआर गवई और न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन की पीठ ने केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की इस दलील पर भी गौर किया कि फैसला लेने की प्रक्रिया में कई बातों पर विचार किया जाता है। पीठ ने शिक्षाविद जहूर अहमद भट और सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता अहमद मलिक की ओर से दायर याचिका को आठ हफ्ते बाद सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया।
विज्ञापन


'फैसला संसद और कार्यपालिका को लेना है'
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन की ओर से जल्द सुनवाई की मांग पर सीजेआई ने कहा, 'पहलगाम में जो हुआ उसे आप नजरअंदाज नहीं कर सकते। फैसला संसद और कार्यपालिका को लेना है।'
विज्ञापन


तुषार मेहता ने याचिका खारिज करने की मांग की
केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने याचिका खारिज करने की मांग करते हुए कहा कि पहले भी अदालत ने ऐसी याचिकाओं पर जुर्माना लगाया है। मेहता ने कहा, 'चुनाव होते रहते हैं, माननीय न्यायाधीश देश के इस हिस्से में उभर रही अजीबोगरीब स्थिति से अवगत हैं और निर्णय लेने में कई बातों का ध्यान रखना होता है।'
विज्ञापन
विज्ञापन


'हुजूर को केंद्र पर पूरा भरोसा था'
भट की ओर से पेश शंकरनारायणन ने कहा कि संविधान पीठ द्वारा संविधान के अनुच्छेद 370 को निरस्त करने सहित अन्य मुद्दों पर फैसला सुनाए 21 महीने हो चुके हैं। शंकरनारायणन ने कहा, 'इसमें कोई प्रगति नहीं हुई है, क्योंकि हुजूर को केंद्र पर पूरा भरोसा था, जब उन्होंने अदालत के सामने यह बयान दिया था कि वे राज्य का दर्जा लागू करेंगे।'

'कोई समय-सीमा निर्धारित नहीं की थी'
फैसले का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि पीठ ने सॉलिसिटर जनरल द्वारा दिए गए इस आश्वासन के मद्देनजर इस मुद्दे पर कोई टिप्पणी नहीं की कि जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल किया जाएगा। शंकरनारायणन ने कहा कि पीठ ने केवल राज्य का दर्जा जल्द से जल्द बहाल करने का निर्देश दिया था और कोई समय-सीमा निर्धारित नहीं की थी।




अनुच्छेद 370 को रद्द करने के फैसले को बरकरार रखा था
इससे पहले 11 दिसंबर 2023 को सर्वोच्च न्यायालय ने सर्वसम्मति से अनुच्छेद 370 को रद्द करने के फैसले को बरकरार रखा था। अनुच्छेद 370 ने जम्मू और कश्मीर राज्य को विशेष दर्जा दे रखा  था। साथ ही कोर्ट ने आदेश दिया था कि केंद्र शासित प्रदेश में सितंबर 2024 तक विधानसभा चुनाव कराए जाएं और इसका राज्य का दर्जा जल्द से जल्द बहाल किया जाए। पिछले साल शीर्ष अदालत में एक याचिका दायर कर केंद्र को दो महीने के भीतर जम्मू और कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने का निर्देश देने की मांग की गई थी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed