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मथुरा मंदिर-मस्जिद विवाद: 'कई मुकदमों को साथ जोड़ने से दोनों पक्षों को हो सकता है फायदा', सुप्रीम कोर्ट

Fri, 10 Jan 2025 12:01 PM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: काव्या मिश्रा Updated Fri, 10 Jan 2025 12:01 PM IST
सार

मुख्य न्यायधीश संजीव खन्ना और न्यायधीश संजय कुमार की पीठ ने प्रारंभिक रूप से हाईकोर्ट के फैसले के पक्ष में विचार किया और कहा कि यह दोनों पक्षों के हित में है। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर जरूरत पड़े, तो बाद में इस मामले को उठाया जा सकता है। 
 

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SC said Plea against combining multiple lawsuits in Mathura temple-mosque dispute may be raised later
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : पीटीआई

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने मथुरा श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मस्जिद विवाद से संबंधित कई मुकदमों को एक साथ जोड़ने के मामले में कहा कि प्राथमिक रूप से यह दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद हो सकता है। साथ ही यह भी कहा कि हिंदू याचिकाकर्ताओं के 15 मुकदमों को एक साथ जोड़ने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका बाद में उठाई जा सकती है।

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दोनों पक्षों के हित में हाईकोर्ट का फैसला
मुख्य न्यायधीश संजीव खन्ना और न्यायधीश संजय कुमार की पीठ ने प्रारंभिक रूप से हाईकोर्ट के फैसले के पक्ष में विचार किया और कहा कि यह दोनों पक्षों के हित में है। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर जरूरत पड़े, तो बाद में इस मामले को उठाया जा सकता है। 
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क्या बोले सीजेआई?
11 जनवरी 2024 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हिंदू याचिकाकर्ताओं द्वारा दायर 15 मुकदमों को जोड़ने का आदेश दिया था, ताकि न्याय के हित में इन पर एक साथ सुनवाई हो सके। पीठ ने शुक्रवार को सुनवाई की शुरुआत में कहा कि वह पूजा स्थलों से जुड़े 1991 के एक कानून से संबंधित एक मुद्दे पर विचार कर रही है और पूछा कि उसे इस समय मुकदमों को एकसाथ जोड़ने के मामले में हस्तक्षेप क्यों करना चाहिए। सीजेआई ने मस्जिद समिति का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील से कहा, 'अगर जरूरत पड़ी तो आप बाद में याचिका दायर कर सकते हैं।'
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इससे पहले, 12 दिसंबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश दिया था, जिसमें देशभर की अदालतों को धार्मिक स्थलों, खासकर मस्जिदों और दरगाहों को पुनः प्राप्त करने के लिए दायर नए मुकदमों पर कोई आदेश न देने की हिदायत दी थी।


शुक्रवार को शाही ईदगाह मस्जिद समिति के वकील ने कहा कि ये मुकदमे एक जैसे नहीं हैं, फिर भी हाईकोर्ट ने इन्हें जोड़ दिया है, जिससे परेशानी हो सकती है। इस पर सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि यह दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद होगा क्योंकि इससे अलग-अलग मामलों की सुनवाई के बजाय एक साथ सुनवाई होगी। 

एक अप्रैल को होगी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे पर आगे सुनवाई के लिए याचिका को 1 अप्रैल 2025 से शुरू होने वाले सप्ताह में फिर से सूचीबद्ध करने का आदेश दिया।
 

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