SC: सबूत बदलने के मामले में एंटनी राजू के खिलाफ फिर चलेगा मुकदमा, सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत को दिया आदेश
SC: सुप्रीम कोर्ट ने सबूत बदलने के मामले में केरल के पूर्व मंत्री एंटनी राजू के खिलाफ मुकदमा चलाने का आदेश दिया है। शीर्ष कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश को सही ठहराते हुए निचली अदालत को एक साल के भी सुनवाई पूरी करने का आदेश दिया।
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को केरल के पूर्व मंत्री एंटनी राजू के खिलाफ एक पुराने मामले में निचली अदालत में फिर से कार्यवाही शुरू करने का आदेश दिया। यह मामला 1990 में नशीले पदार्थों की बरामदी से जुड़ा है। आरोप है कि राजू ने सबूतों के साथ छेड़छाड़ की थी। जस्टिसस सी.टी.रविकुमार और जस्टिस संजय करोल की पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट का यह फैसला कानूनी रूप से सही था कि राजू के खिलाफ निचली अदालत में फिर से कार्यवाही की जाए। शीर्ष कोर्ट ने निचली अदालत को निर्देश दिया कि वह इस मामले की सुनवाई एक साल के भीतर पूरी करे।
कोर्ट ने यह भी कहा कि राजू को 20 दिसंबर या फिर उसके बाद किसी भी तारीख को निचली अदालत में हाजिर होना होगा। केरल हाईकोर्ट ने 10 मार्च 2023 को तकनीकी कारणों से इस मामले में कार्यवाही को रद्द कर दिया था। राजू जनादिपथ्य केरल कांग्रेस (वाम लोकतांत्रिक मोर्चा का सहयोगी दल) के सदस्य हैं। उन पर आरोप था कि उन्होंने 1990 में नशीली दवाओं की बरामदगी के मामले में सबूतों के साथ छेड़छाड़ की थी। राजू नशील दवाओं के मामले में वकील थे।
पूरा मामला क्या था
यह मामला एक ऑस्ट्रेलियाई नागरिक से जुड़ा था, जिसे 1990 में तिरुवनंतपुरम हवाई अड्डे पर हैशिश (नशीली दवा) की तस्करी के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। अभियोजन पक्ष (सरकार) ने उसे दोषी साबित करने के लिए एक सबूत पेश किया था। जिसमें बताया गया था कि आरोपी ने जो इनरवियर पहना था, उसमें हैशिश छिपाई गई थी। लेकिन आरोपी के वकील ने कोर्ट को बताया कि वह इनरवियर उस ऑस्ट्रेलियाई नागरिक के लिए बहुत छोटा था, यानी वह इनरवियर उस व्यक्ति के आकार के हिसाब से फिट नहीं था। इस वजह से 1993 में केरल हाईकोर्ट ने उस व्यक्ति को निर्दोष माना और उसे बरी कर दिया था।
सुप्रीम कोर्ट ने दिया फिर कार्यवाही का आदेश
इसके बाद पुलिस जांच में पता चला कि राजू ने अदालत से इनरवियर प्राप्त किया था और उसे चार महीने बाद आरोपी को लौटाया गया। इसके बाद जिला कोर्ट ने राजू और कोर्ट के क्लर्क के खिलाफ सबूत बदलने का मामला दर्ज करने का आदेश दिया था। बाद में हाईकोर्ट ने इस मामले को तकनीकी कारणों से खारिज किया लेकिन यह भी कहा कि आरोप गंभीर हैं और न्यायिक कार्यों में दखल देते हैं, जिससे न्याय प्रणाली पर असर पड़ता है। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि इन आरोपों की सही तरीके से जांच होनी चाहिए और दोषियों को सजा होनी चाहिए। अब सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में फिर से कार्यवाही शुरू करने का आदेश दिया है।
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