फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   SC reserve verdict in cheating case against Sukhbir and his father Parkash Singh badal over 2 SAD constitution

SC: शिअद के दो संविधानों को लेकर धोखाधड़ी के मामले में शीर्ष कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा, की अहम टिप्पणी

Tue, 11 Apr 2023 10:36 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Tue, 11 Apr 2023 10:36 PM IST
सार

बादल परिवार और चीमा ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के अगस्त, 2021 के आदेश को चुनौती दी है। हाईकोर्ट ने जालसाजी, धोखाधड़ी और तथ्यों को छिपाने के आरोप में खेड़ा की ओर से दायर निजी शिकायत में अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, होशियारपुर के उनके खिलाफ समन को खारिज करने से इन्कार कर दिया था।

विज्ञापन
SC reserve verdict in cheating case against Sukhbir and his father Parkash Singh badal over 2 SAD constitution
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : Social Media

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल व उनके पिता प्रकाश सिंह बादल के खिलाफ जालसाजी की याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। मामले में फैसला सुरक्षित रखते हुए शीर्ष अदालत ने कहा कि केवल धार्मिक होने का मतलब यह नहीं है कि कोई व्यक्ति धर्म निरपेक्ष नहीं हो सकता है। इस मामले में आज जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस सीटी रवि कुमार की पीठ ने सुनवाई की। इस दौरान पीठ ने शिकायतकर्ता सामाजिक कार्यकर्ता बलवंत सिंह खेड़ा, बादल परिवार और शिअद के वरिष्ठ नेता दलजीत सिंह चीमा के वकील से दो दिनों में लिखित दलीलें दाखिल करने को कहा है। 

विज्ञापन


मिली जानकारी के मुताबिक, बादल परिवार और चीमा ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के अगस्त, 2021 के आदेश को चुनौती दी है। हाईकोर्ट ने जालसाजी, धोखाधड़ी और तथ्यों को छिपाने के आरोप में खेड़ा की ओर से दायर निजी शिकायत में अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, होशियारपुर के उनके खिलाफ समन को खारिज करने से इन्कार कर दिया था।
विज्ञापन


सोमवार को इस मामले की सुनवाई करीब ढाई घंटे चली। सुनवाई में पीठ ने कहा, केवल एक धार्मिक व्यक्ति होने का मतलब यह नहीं है कि आप एक धर्मनिरपेक्ष व्यक्ति नहीं हो सकते। प्रकाश सिंह बादल के वकील केवी विश्वनाथन ने कहा, एक व्यक्ति एक ही समय में धार्मिक और धर्मनिरपेक्ष दोनों हो सकता है। आप धार्मिक होने के अपने अधिकार का सम्मान करते हैं लेकिन आपको अन्य लोगों के धार्मिक होने के अधिकार का भी सम्मान करना होगा। मैं एक ही समय में धार्मिक और धर्मनिरपेक्ष हो सकता हूं। यह जालसाजी और धोखाधड़ी का मामला कैसे हो सकता है?
विज्ञापन
विज्ञापन


प्रकाश सिंह बादल को एक अभियुक्त के रूप में पेश भी नहीं किया गया
इस दौरान प्रकाश सिंह बादल के वकील विश्वनाथन ने कहा कि प्रकाश सिंह बादल को एक अभियुक्त के रूप में पेश भी नहीं किया गया था। इसके अलावा, शिकायतकर्ता के संशोधन आवेदनों को निचली अदालत ने दो बार खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने समन को खारिज करने से इन्कार करते हुए कहा कि इन सभी मुद्दों को सुनवाई के दौरान उठाया जा सकता है। उन्होंने कहा, विरोधी पार्टी ने अकाली दल का पंजीकरण रद्द करने के लिए चुनाव आयोग का दरवाजा खटखटाया था।

शिअद ने कोई संशोधन नहीं किया और निर्वाचन आयोग को धोखा दिया
इस पर खेड़ा के वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि शिकायतकर्ता गवाह मंजीत सिंह की गवाही से रिकॉर्ड में आया है कि चुनाव आयोग के समक्ष एक हलफनामा दिया गया था कि शिरोमणि अकाली दल संविधान और प्रस्तावना के प्रति निष्ठा रखता है। पार्टी अपने पुराने संविधान में संशोधन करेगी। लेकिन शिअद ने गुरुद्वारा चुनाव आयोग को सौंपे अपने पुराने संविधान में कोई संशोधन नहीं किया। भूषण ने आरोप लगाया कि शिअद ने चुनाव आयोग को एक मनगढ़ंत शपथपत्र दिया जिसके आधार पर चुनाव आयोग ने शिअद को राजनीतिक दल के रूप में पंजीकृत किया।

भूषण ने कहा, गुरुद्वारे के चुनाव के लिए अकाली दल को एक धार्मिक पार्टी होना चाहिए और विधानसभा व लोकसभा चुनाव के लिए राजनीतिक दल को धर्मनिरपेक्ष होना चाहिए और संविधान के प्रति निष्ठा जतानी चाहिए।

पीठ ने दी प्रतिक्रिया
पीठ ने हालांकि कहा, शिअद ने किसी भी दस्तावेज में धोखाधड़ी नहीं की है। निर्वाचन आयोग के समक्ष उसने अपना ही संविधान दिया है और उसमें किसी तरह का हेरफेर नहीं किया गया है। उन्होंने ऐसा कोई दस्तावेज दाखिल नहीं किया जो उसका संविधान न हो बल्कि एक शपथपत्र दिया है कि वे संविधान में संशोधन करेंगे। अब क्या इसे धोखाधड़ी या जालसाजी मााना जाए?


ये है मामला
खेड़ा ने 2009 में एक शिकायत में आरोप लगाया था कि शिअद के दो संविधान हैं। एक जो उसने गुरुद्वारा चुनाव आयोग को गुरुद्वारों के प्रबंधन के लिए एक पार्टी के रूप में पंजीकरण के लिए प्रस्तुत किया। दूसरा भारत के निर्वाचन आयोग को एक राजनीतिक दल के रूप में मान्यता प्राप्त करने के लिए दिया। यह एक तरह की धोखाधड़ी और जालसाजी है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed