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SC: पांच जजों की पीठ को भेजा गया इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए राजनीतिक दलों की फंडिंग का केस, 30 अक्तूबर को सुनवाई

Mon, 16 Oct 2023 12:15 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Mon, 16 Oct 2023 12:15 PM IST
सार

वकील प्रशांत भूषण ने बेंच के सामने कहा था कि 2024 के आम चुनाव के लिए इलेक्टोरल बॉन्ड जारी होने से पहले इस योजना का न्यायिक परीक्षण जरूरी है। इसी मामले को कोर्ट ने अब बड़ी बेंच के पास भेजा है।

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SC refers to 5-judge bench pleas challenging validity of electoral bond scheme for political funding of partie
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

राजनीतिक दलों को इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए चंदा मिलने के मामले को अब सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की पीठ सुनवाई करेगी। सोमवार को ही इस मामले में याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने यह आदेश दिया। कोर्ट ने पांच जजों की पीठ द्वारा इस मामले पर सुनवाई के लिए 30 अक्तूबर की तारीख भी मुकर्रर कर दी।   
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कोर्ट ने कहा कि उसे इलेक्टोरल बॉन्ड की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर एक आवेदन मिला, जिसमें कहा गया था कि इस पर अंतिम निर्णय के लिए इसे बड़ी बेंच के पास भेजा जाए। गौरतलब है कि इससे पहले वकील प्रशांत भूषण ने बेंच के सामने कहा था कि 2024 के आम चुनाव के लिए यह योजना शुरू होने से पहले इसका न्यायिक परीक्षण जरूरी है। 
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इस मामले पर चार जनहित याचिकाएं लंबित हैं। इनमें से एक याचिकाकर्ता ने मार्च में कहा था कि चुनावी बॉन्ड के माध्यम से राजनीतिक दलों को अब तक 12,000 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है और इसकी दो-तिहाई राशि एक प्रमुख राजनीतिक दल को गई है। दावा किया जाता है कि राजनीतिक वित्तपोषण में पारदर्शिता लाने के प्रयासों के तहत चुनावी बॉन्ड को दलों को दिए जाने वाले नकद चंदे के विकल्प के रूप में पेश किया गया है।
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गैर सरकारी संगठन एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) की ओर से पेश भूषण ने कहा, चुनावी बॉन्ड के जरिये अज्ञात स्रोतों से होने वाली फंडिंग भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रही है और भ्रष्टाचार मुक्त देश में रहने के नागरिकों के अधिकार का हनन कर रही है। यह संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है।
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