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Teesta Setalvad: तीस्ता पर सुनवाई में देरी को लेकर सीजेआई ने जताई नाराजगी, गुजरात सरकार से पूछा तीखा सवाल

Thu, 01 Sep 2022 07:53 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amit Mandal Updated Thu, 01 Sep 2022 07:53 PM IST
सार

सीजेआई ने पूछा कि ऐसे उदाहरण दें जहां ऐसे मामलों में आरोपी महिला को उच्च न्यायालय से ऐसी तारीखें मिली हों। अदालत यह तारीख कैसे दे सकती है? क्या गुजरात में यह मानक प्रथा है?

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SC questions delayed listing of bail plea of Setalvad
सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ और पूर्व आईपीएस आरबी श्रीकुमार - फोटो : सोशल मीडिया (फाइल)

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने हैरत जताई कि गुजरात हाई कोर्ट ने कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ की जमानत याचिका को 19 सितंबर को सुनवाई के लिए क्यों सूचीबद्ध किया है। हाई कोर्ट द्वारा राज्य सरकार को नोटिस दिए जाने के छह सप्ताह बाद शीर्ष अदालत ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए सरकार से तीस्ता की याचिका पर जवाब मांगा है और शुक्रवार दोपहर दो बजे तक उसे सूचित करने के लिए कहा। प्रधान न्यायाधीश उदय उमेश ललित, न्यायमूर्ति एस रवींद्र भट और न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की पीठ ने सीतलवाड़ की याचिका पर अगली सुनवाई शुक्रवार को तय की। सीतलवाड़ को 2002 के गुजरात दंगों के मामलों में निर्दोष लोगों को फंसाने के लिए कथित तौर पर सबूत गढ़ने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।

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अदालत यह तारीख कैसे दे सकती है?
सीजेआई ने कहा कि हम इस मामले की सुनवाई कल दोपहर दो बजे करेंगे। जाहिर तौर पर नाखुश सीजेआई ने कहा कि ऐसे उदाहरण दें जहां ऐसे मामलों में आरोपी महिला को उच्च न्यायालय से ऐसी तारीखें मिली हों। या तो इस महिला को अपवाद बनाया गया है। अदालत यह तारीख कैसे दे सकती है? क्या गुजरात में यह मानक प्रथा है?
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इस दौरान अदालत ने सॉलिसिटर जनरल से पूछा- तीस्ता के खिलाफ न तो यूएपीए और न ही पोटा (POTA) का केस दर्ज है, फिर भी दो महीने से आपने उन्हें कस्टडी में रखा है। शुक्रवार को दोपहर 2 बजे फिर इस मामले में सुनवाई होगी। तीस्ता की जमानत का विरोध करते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि मामला हाईकोर्ट में है, इसलिए आप वहीं सुनवाई होने दें। तीस्ता की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल तो गुजरात सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल मेहता पेश हुए।

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गुजरात उच्च न्यायालय ने तीन अगस्त को सीतलवाड़ की जमानत याचिका पर राज्य सरकार को नोटिस जारी किया था और मामले की सुनवाई 19 सितंबर को तय की थी। अहमदाबाद की एक सत्र अदालत ने 30 जुलाई को सीतलवाड़ और पूर्व महानिदेशक पुलिस आरबी श्रीकुमार की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। अदालत ने कहा था कि अगर इन्हें रिहा किया जाता है, तो यह गलत काम करने वालों को संदेश देगा कि कोई भी बिना सजा के आरोप लगा सकता है और इससे बच सकता है।

तीस्ता पर लोगों को फंसाने के लिए झूठे सबूत गढ़ने का आरोप
सीतलवाड़ और श्रीकुमार दोनों को जून में गिरफ्तार किया गया था, उन पर 2002 के गोधरा दंगों के बाद के मामलों में निर्दोष लोगों को फंसाने के लिए सबूत गढ़ने का आरोप है। वे साबरमती केंद्रीय जेल में बंद हैं। श्रीकुमार ने जमानत के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया है। मामले के तीसरे आरोपी पूर्व आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट ने जमानत के लिए आवेदन नहीं किया है। भट्ट पहले से ही एक अन्य आपराधिक मामले में जेल में थे जब उन्हें इस मामले में गिरफ्तार किया गया था।  


मुंबई के सीतलवाड़ और श्रीकुमार को 24 जून को सुप्रीम कोर्ट द्वारा जकिया जाफरी द्वारा दायर एक याचिका खारिज करने के कुछ दिनों के भीतर गिरफ्तार कर लिया गया था। जकिया के पति और पूर्व कांग्रेस सांसद एहसान जाफरी अहमदाबाद में दंगों के दौरान मारे गए थे, जिसमें एसआईटी की क्लीन चिट को चुनौती दी गई थी।  

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