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SC: महाराष्ट्र सरकार को 'सुप्रीम' फटकार, कहा- सरकार के पास मुफ्त योजनाओं के लिए पैसे हैं, मुआवजे के लिए नहीं
Wed, 07 Aug 2024 09:11 PM IST
बशु जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: बशु जैन
Updated Wed, 07 Aug 2024 09:11 PM IST
सार
न्यायमूर्ति बीआर गवई, न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने राज्य सरकार को 13 अगस्त जवाब दाखिल करने के लिए कहा। इस दौरान पीठ ने कहा कि अगर आदेश का पालन नहीं होता है तो मुख्य सचिव अदालत में पेश होंगे। पीठ ने कहा कि राज्य सरकार को अदालत के हर आदेश को हल्के में नहीं लेना चाहिए।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने वन भूमि पर इमारतों के निर्माण से प्रभावित व्यक्ति को मुआवजा नहीं देने के मामले में जवाब दाखिल न करने पर महाराष्ट्र सरकार को फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार पर लाडली बहना और लड़का भाऊ जैसी मुफ्त योजनाओं के लिए धन है, लेकिन जमीन के नुकसान का मुआवजा देने के लिए पैसा नहीं है।
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न्यायमूर्ति बीआर गवई, न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने राज्य सरकार को 13 अगस्त जवाब दाखिल करने के लिए कहा। इस दौरान पीठ ने कहा कि अगर आदेश का पालन नहीं होता है तो मुख्य सचिव अदालत में पेश होंगे। पीठ ने कहा कि राज्य सरकार को अदालत के हर आदेश को हल्के में नहीं लेना चाहिए।
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कोर्ट महाराष्ट्र में वन भूमि पर भवनों के निर्माण से संबंधित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। मामले में राज्य सरकार ने दावा किया था कि जमीन पर केंद्र के रक्षा विभाग की शाखा आर्मामेंट रिसर्च डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट इंस्टीट्यूट (ARDEI) का कब्जा था। बाद में जमीन को निजी पक्ष को आवंटित कर दिया गया। इसके बाद जांच में पाया गया कि निजी पक्ष को आवंटित भूमि को वन भूमि थी।
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मामले में सुनवाई के दौरान 23 जुलाई को पीठ ने कहा था कि सबसे पहले किसी नागरिक की भूमि पर अतिक्रमण करने की राज्य सरकार की कार्रवाई अवैध थी। दूसरे राज्य सरकार को भूमि का टुकड़ा आवंटित करने से पहले सावधानी बरतनी चाहिए थी। पहले तो सरकार को वन भूमि आंवटित नहीं करनी चाहिए थी। मामला लगभग 15 वर्षों से लंबित है। पीठ ने कहा कि राज्य सरकार अभी तक कोई ठोस प्रस्ताव नहीं लाई है। पीठ ने राज्य सरकार से अपना जवाब दाखिल करने और तीन सवालों पर अपना रुख स्पष्ट करने को कहा था।
कोर्ट ने पूछा था कि क्या याचिकाकर्ता निजी पक्ष को समकक्ष भूमि का एक और टुकड़ा दिया जाएगा? क्या याचिकाकर्ताओं को पर्याप्त मुआवजा दिया जाएगा और क्या राज्य सरकार भूमि को वन भूमि के रूप में गैर अधिसूचित करने का प्रस्ताव केंद्र सरकार के पास भेजेगी? इस पर कोर्ट ने राज्य सरकार को दो सप्ताह में अपना जवाब दाखिल करने को कहा था। मगर सरकार ने कोई जवाब नहीं दिया। अब कोर्ट ने कहा कि अगर राज्य सरकार अपना रुख स्पष्ट नहीं करती है तो हमें मुख्य सचिव को हाजिर होने का निर्देश देना पड़ेगा।