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SC: GM सरसों को मंजूरी देने के GEAC के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने की सुनवाई, यथास्थिति बनाए रखने का दिया आदेश

Thu, 03 Nov 2022 11:08 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Thu, 03 Nov 2022 11:08 PM IST
सार

न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी और न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की पीठ ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से यह सुनिश्चित करने को कहा कि जब तक इस संबंध में उसके समक्ष दायर आवेदन की सुनवाई नहीं हो जाती, तब तक कोई त्वरित कार्रवाई नहीं की जाए।

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SC orders status quo on GEAC's decision to approve GM mustard for commercial cultivation
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आनुवंशिक रूप से संशोधित सरसों को व्यावसायिक खेती के लिए मंजूरी देने के जेनेटिक इंजीनियरिंग मूल्यांकन समिति (जीईएसी) के हालिया फैसले को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सुनवाई की। इस दौरान न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी और न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की पीठ ने यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है।  

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इस दौरान, न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी और न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की पीठ ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से यह सुनिश्चित करने को कहा कि जब तक इस संबंध में उसके समक्ष दायर आवेदन की सुनवाई नहीं हो जाती, तब तक कोई त्वरित कार्रवाई नहीं की जाए। पीठ ने यह भी कहा कि' याचिकाकर्ता मामले में अतिरिक्त दस्तावेज भी दाखिल कर सकता है। पक्षकारों के अधिवक्ताओं से अनुरोध है कि वे मामले को आगे बढ़ाने से पहले अपने प्रस्तावित प्रस्तुतीकरण पर संक्षिप्त नोट भी दाखिल करें।'
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मामले में अरुणा रोड्रिग्स याचिकाकर्ता हैं। उनकी ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने अदालत को बताया कि उसने 2012 में भारत में जीएम (जेनेटिकली मॉडिफाइड) फसलों के मामले की विस्तार से जांच करने के लिए व्यापक संदर्भ वाली तकनीकी विशेषज्ञ समिति का गठन किया था। गौरतलब है कि जीईएसी ने जीएम सरसों के पर्यावरणीय रिलीज की सिफारिश की है। यह सरसों की व्यावसायिक खेती का मार्ग प्रशस्त करता है।
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प्रवासी मजदूरों के बच्चों के लिए समान शिक्षा की मांग वाली याचिका निराधार
सुप्रीम कोर्ट ने कोरोना महामारी के दौरान डिजिटल विभाजन और भेदभाव से बचने के लिए प्रवासी मजदूरों के लिए एक समान शिक्षा की मांग वाली याचिका को निराधार करार दिया। 2020 में दायर याचिका में दलील दी गई थी कि कोरोना महामारी के दौरान ज्यादातर स्कूलों में पढ़ाई ऑनलाइन हुई। ऐसे में प्रवासी मजदूरों के बच्चों को शिक्षा का समान अधिकार नहीं मिला। 


केस सूचीबद्ध न करने पर रजिस्ट्री अफसरों से मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को अपनी रजिस्ट्री के अधिकारियों से यह बताने के लिए कहा है कि उन्होंने डेढ़ साल से सुनवाई के लिए तैयार एक केस को पीठ के सामने सूचीबद्ध क्यों नहीं किया। चीफ जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस बेला एम त्रिवेदी की पीठ ने कहा, इस कोर्ट द्वारा 1 नवंबर को जारी आदेश की अनुपालना में 2 नवंबर की तारीख में संबंधित रजिस्ट्रार के हस्ताक्षर से एक रिपोर्ट हमारे सामने दाखिल की गई है। मामले में हम किसी नतीजे पर पहुंचें, उससे पहले संबंधित अधिकारियों को यह मौका मिलना चाहिए कि वह अपना पक्ष हमारे सामने रख सकें।

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