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Supreme Court: देशव्यापी कैंसर रिपोर्टिंग पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र और राज्य की सरकारों को किया जवाब तलब

Fri, 12 Dec 2025 11:03 PM IST
हिमांशु चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु चंदेल Updated Fri, 12 Dec 2025 11:03 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने देश में कैंसर को अनिवार्य रूप से नोटिफाई करने पर केंद्र और राज्यों से जवाब मांगा है। अदालत डॉक्टर अनुराग श्रीवास्तव की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें कहा गया कि कैंसर रिपोर्टिंग अनिवार्य न होने से सही आंकड़े नहीं मिलते और इलाज देर से शुरू होता है। 

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SC notice cancer notification India Supreme Court case registry mandatory reporting India rural data gap
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI

विस्तार

देश में बढ़ते कैंसर मामलों और उनके इलाज में देरी को गंभीर मानते हुए सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को केंद्र सरकार और सभी राज्यों को नोटिस जारी किया है। अदालत ने पूछा है कि क्या पूरे देश में कैंसर को ‘नॉटिफाएबल बीमारी’ घोषित किया जाना चाहिए, ताकि हर मरीज की जानकारी सरकार तक समय पर पहुंचे और इलाज में देरी न हो।

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चीफ जस्टिस सूर्य कांत की अगुवाई वाली पीठ डॉक्टर अनुराग श्रीवास्तव की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। डॉक्टर श्रीवास्तव एम्स दिल्ली में सर्जरी विभाग के प्रमुख रह चुके हैं। उन्होंने कहा कि देश में कैंसर की रिपोर्टिंग अनिवार्य न होने से न सरकार को सही आंकड़े मिल पाते हैं और न ही मरीजों का इलाज समय पर शुरू हो पाता है। याचिका में बताया गया कि कुछ राज्यों ने कैंसर को नॉटिफाएबल बीमारी घोषित किया है, जबकि कई राज्यों में यह लागू ही नहीं है, जिससे देशभर में रिपोर्टिंग और इलाज में बड़ी असमानता है।
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सही आंकड़ों की भारी कमी
याचिका के अनुसार, आईसीएमआर की कैंसर रजिस्ट्री फिलहाल केवल लगभग 10% आबादी को ही कवर करती है। ग्रामीण इलाकों की कवरेज तो सिर्फ 1% के आस-पास है। इसका मतलब है कि देश में कैंसर के असली आंकड़े सरकार तक पहुंचते ही नहीं। इससे न बीमारी पर काबू पाने की सही रणनीति बन पाती है और न मरीजों को समय पर इलाज।
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डिजिटल कैंसर रजिस्ट्री की मांग
याचिकाकर्ता ने कहा कि पूरे देश में एक रियल-टाइम डिजिटल कैंसर रजिस्ट्री बनाई जाए, जैसे कोविन प्लेटफॉर्म ने टीकाकरण के दौरान किया था। इससे हर मरीज का रिकॉर्ड तुरंत सिस्टम में दर्ज होगा और इलाज में देरी नहीं होगी। उन्होंने यह भी कहा कि गलत प्रचार और अप्रमाणित इलाज।  जैसे गोमूत्र से कैंसर ठीक होने के दावों से लोगों को बचाना जरूरी है, क्योंकि इससे कई मरीज सही इलाज से दूर हो जाते हैं।

कोर्ट में अगली सुनवाई
अदालत ने केंद्र और राज्यों से जवाब मांगा है कि देश में कैंसर को नॉटिफाएबल बीमारी बनाने पर उनकी क्या राय है और इस दिशा में वे क्या कदम उठा सकते हैं। कोर्ट अब आगे की सुनवाई सरकार और राज्यों के जवाब मिलने के बाद करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह नियम लागू हुआ, तो देश में कैंसर को लेकर आंकड़ा प्रणाली और इलाज की व्यवस्था पहले से कहीं बेहतर हो सकती है।

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