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Supreme Court: जस्टिस त्रिवेदी की नसीहत, विशेष कानूनों के तहत गिरफ्तारी पर दखल में दिलचस्पी न दिखाएं अदालतें
Fri, 28 Feb 2025 07:09 AM IST
दीपक कुमार शर्मा
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: दीपक कुमार शर्मा
Updated Fri, 28 Feb 2025 07:09 AM IST
सार
जस्टिस त्रिवेदी ने सीजेआई खन्ना व जस्टिस सुंदरेश के बहुमत वाले फैसले से सहमति जताई। साथ ही, 13 पन्नों का अलग फैसला भी लिखा। इसमें कहा, जब विशेष अधिनियमों के तहत गिरफ्तारी की वैधता को चुनौती दी जाती है, तो अदालत को न्यायिक समीक्षा की शक्ति का प्रयोग करने से बचना चाहिए।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : ANI
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस बेला त्रिवेदी ने जीएसटी मामले में अलग लिखे फैसले में कहा कि पीएमएलए, यूएपीए, सीमा शुल्क अधिनियम, जीएसटी अधिनियमों जैसे विशेष कानूनों के तहत गिरफ्तारी की वैधता के मामले में अदालतों को हस्तक्षेप में बहुत दिलचस्पी नहीं लेनी चाहिए।
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जस्टिस त्रिवेदी ने सीजेआई खन्ना व जस्टिस सुंदरेश के बहुमत वाले फैसले से सहमति जताई। साथ ही, 13 पन्नों का अलग फैसला भी लिखा। इसमें कहा, जब विशेष अधिनियमों के तहत गिरफ्तारी की वैधता को चुनौती दी जाती है, तो अदालत को न्यायिक समीक्षा की शक्ति का प्रयोग करने से बचना चाहिए। उन्होंने कहा, अधिकारी किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करने के लिए जिस सामग्री के आधार पर विश्वास बनाता है, उसकी पर्याप्तता या तथ्यों की सत्यता न्यायिक समीक्षा का विषय नहीं हो सकती। न ही अधिकृत अधिकारी की व्यक्तिपरक राय या संतुष्टि की जांच न्यायिक समीक्षा का विषय है, क्योंकि जब विशेष अधिनियम में गिरफ्तारी होती है, तो मामला जांच या पूछताछ के बहुत ही प्रारंभिक चरण में होता है। विशेष अधिनियमों के कड़े प्रावधानों की व्याख्या करने में कोई भी उदार नजरिया कानूनों के मूल मकसद और लक्ष्य को विफल कर सकता है।
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बेईमानों को मिल सकती है हिम्मत
जस्टिस त्रिवेदी ने कहा, गंभीर अपराधों से निपटने के लिए अधिकारियों के कामकाज में अदालतों के बार-बार या आकस्मिक दखल से बेईमान तत्वों को अपराध करने का साहस मिल सकता है। इससे पीड़ितों और समाज व राष्ट्र के साथ अन्याय होगा। जस्टिस त्रिवेदी ने कहा, प्रौद्योगिकी में प्रगति के साथ अपराधों की प्रकृति और अधिक जटिल और पेचीदा हो गई है। इसलिए न्यायिक समीक्षा की शक्तियों का प्रयोग करते समय छोटी प्रक्रियात्मक चूक को बहुत बड़ा मानकर नहीं देखा जाना चाहिए।
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यह था मामला
सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ताओं ने कर अधिकारियों को कर चोरी व धोखाधड़ी के मामलों में गिरफ्तारी का अधिकार देने वाले प्रावधानों को चुनौती दी थी। तर्क दिया कि ऐसी शक्तियां विधायी मंशा से परे हैं और अनुच्छेद 20(3) व 21 के तहत सांविधानिक सुरक्षा का उल्लंघन करती हैं। सीमा शुल्क अधिनियम के तहत राजस्व खुफिया निदेशालय के समक्ष चुनौती दी गई कि गिरफ्तारी प्रावधान आपराधिक प्रक्रिया संहिता व सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का पालन नहीं करते हैं।
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