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संयोग: ज्ञानवापी मामले में सुनवाई से जुड़े दो जज अयोध्या मंदिर सुनवाई में भी थे शामिल
Tue, 17 May 2022 10:11 PM IST
Amit Mandal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Amit Mandal
Updated Tue, 17 May 2022 10:11 PM IST
सार
जस्टिस चंद्रचूड़ दूसरी बार मंदिर-मस्जिद विवाद से जुड़े मामले की सुनवाई कर रहे हैं। वह तत्कालीन सीजेआई रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच-न्यायाधीशों की संविधान पीठ का हिस्सा थे।
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Gyanvapi Masjid Case
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
यह एक असामान्य संयोग है कि वाराणसी में ज्ञानवापी-शृंगार गौरी परिसर के सर्वेक्षण के खिलाफ याचिका पर सुनवाई कर रहे सुप्रीम कोर्ट के दो न्यायाधीशों का राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मुद्दे से संबंधित इसी तरह के विवाद की सुनवाई में भी शामिल थे। न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा की पीठ ने मंगलवार को वाराणसी के जिला मजिस्ट्रेट को ज्ञानवापी-शृंगार गौरी परिसर के अंदर के क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया जहां सर्वेक्षण में एक शिवलिंग पाए जाने की बात सामने आई है। इसके साथ ही मुसलमानों को नमाज अदा करने की अनुमति दी गई।
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समिति ने वाराणसी सिविल कोर्ट द्वारा अनिवार्य सर्वेक्षण पर रोक लगाने की मांग की है। जस्टिस चंद्रचूड़ दूसरी बार मंदिर-मस्जिद विवाद से जुड़े मामले की सुनवाई कर रहे हैं। वह तत्कालीन सीजेआई रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच-न्यायाधीशों की संविधान पीठ का हिस्सा थे, जिसने 9 नवंबर को अयोध्या में विवादित स्थल पर राम मंदिर के निर्माण का रास्ता साफ कर दिया था और केंद्र को सुन्नी वक्फ बोर्ड को मस्जिद बनाने के लिए 5 एकड़ जमीन आवंटित करने का निर्देश दिया था।
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न्यायमूर्ति नरसिम्हा शीर्ष अदालत के न्यायाधीश बनने से पहले एक वरिष्ठ वकील के रूप में मामले से जुड़े थे जो अयोध्या मामले में हिंदू पक्ष की ओर से पेश हुए थे। उन्होंने मामले में गोपाल सिंह विशारद के उत्तरजीवी राजेंद्र सिंह के लिए संविधान पीठ के समक्ष तर्क दिया था। विशारद ने पहली बार 1950 में इस घोषणा के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया था कि वह भगवान श्री राम चंद्र के जन्मस्थान पर अपने धर्म के संस्कारों और सिद्धांतों के अनुसार बिना किसी बाधा के पूजा करने के हकदार हैं।
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