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एल्गार परिषद मामला: नवलखा की याचिका पर NIA और महाराष्ट्र सरकार को SC का नोटिस
Tue, 27 Sep 2022 04:33 PM IST
Amit Mandal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Amit Mandal
Updated Tue, 27 Sep 2022 04:33 PM IST
सार
मामला 31 दिसंबर, 2017 को पुणे में आयोजित एल्गार परिषद सम्मेलन में कथित भड़काऊ भाषणों से संबंधित है, जिसके बारे में पुलिस ने दावा किया था कि अगले दिन कोरेगांव-भीमा युद्ध स्मारक के पास हिंसा हुई थी।
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गौतम नवलखा
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को जेल में बंद कार्यकर्ता गौतम नवलखा की याचिका पर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) और महाराष्ट्र राज्य से जवाब मांगा कि उन्हें एल्गार परिषद मामले में न्यायिक हिरासत के बजाय घर में नजरबंद रखा जाए। 70 वर्षीय कार्यकर्ता ने मुंबई के पास तलोजा जेल में पर्याप्त चिकित्सा और अन्य बुनियादी सुविधाओं की कमी की आशंकाओं को लेकर बंबई हाई कोर्ट के 26 अप्रैल के आदेश के खिलाफ शीर्ष अदालत में अपील की है, जहां वह वर्तमान में बंद है। याचिका न्यायमूर्ति के एम जोसेफ और न्यायमूर्ति हृषिकेश रॉय की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आई जिसने एनआईए और राज्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा।
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मामले की अगली सुनवाई 29 सितंबर को
पीठ ने मामले की अगली सुनवाई 29 सितंबर तय की है। मामला 31 दिसंबर, 2017 को पुणे में आयोजित एल्गार परिषद सम्मेलन में कथित भड़काऊ भाषणों से संबंधित है, जिसके बारे में पुलिस ने दावा किया था कि अगले दिन कोरेगांव-भीमा युद्ध स्मारक के पास हिंसा हुई थी। पुणे पुलिस ने दावा किया था कि कार्यक्रम का आयोजन माओवादियों से जुड़े लोगों ने किया था। बाद में एनआईए ने जांच अपने हाथ में ले ली थी। शीर्ष अदालत में सुनवाई के दौरान नवलखा के वकील ने कहा कि याचिकाकर्ता ने शीर्ष अदालत के पिछले साल मई के आदेश के आधार पर जेल में बंद कार्यकर्ता की याचिका पर हाई कोर्ट का रुख किया था।
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अपने पिछले साल के आदेश में शीर्ष अदालत ने जेलों में भीड़भाड़ पर चिंता व्यक्त की थी और कहा था कि आपराधिक प्रक्रिया संहिता के प्रावधानों के तहत अभियुक्तों को नजरबंद करने के आदेश पर विचार करने के लिए अदालतें खुली होंगी। नवलखा ने याचिका में कहा, इस आदेश के आधार पर हमने यह कहते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया था कि मैं (नवलखा) वास्तव में इस मामले में इस अदालत द्वारा निर्धारित सभी मानदंडों को पूरा करता हूं और कृपया घर में मेरी गिरफ्तारी की अनुमति दें क्योंकि मेरा स्वास्थ्य खराब है। मैं 70 वर्ष का हूं। मैं पहले भी नजरबंद रहा हूं और मेरा कोई पिछला आपराधिक इतिहास नहीं है।
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वकील ने कहा कि अगर शीर्ष अदालत ऐसा निर्देश देती है तो नवलखा को मुंबई में, जहां उनकी दो बहनें रहती हैं, या दिल्ली में नजरबंद किया जा सकता है। शीर्ष अदालत के न्यायाधीश एस रवींद्र भट ने 29 अगस्त को नवलखा की याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था।