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SC Updates: भ्रष्टाचार के केस में पंजाब के अफसर को 'सुप्रीम' राहत; तेलंगाना सीएम के खिलाफ BJP की याचिका

Fri, 05 Sep 2025 03:34 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: पवन पांडेय Updated Fri, 05 Sep 2025 03:34 PM IST
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SC grants pre-arrest bail to Punjab official in graft case, disapproves HC's approach
सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो) - फोटो : ANI
सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब सरकार के एक कर्मचारी को 2021 में दर्ज भ्रष्टाचार मामले में अग्रिम जमानत दे दी है। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई और उसकी कार्यप्रणाली को असामान्य करार दिया।
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क्या है पूरा मामला?
गुरसेवक सिंह, जो पंजाब सरकार में अधिकारी हैं, के खिलाफ 2021 में एक भ्रष्टाचार का मामला दर्ज हुआ था। उन पर रिश्वत लेने का आरोप है। इस मामले में चार साल तक उनकी गिरफ्तारी नहीं हुई। 2025 में गुरसेवक सिंह ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत की अर्जी दाखिल की। इसी मामले में एक अन्य आरोपी, जिस पर रिश्वत की रकम लेने का सीधा आरोप था, को हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत दे दी।
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हाईकोर्ट का अजीब आदेश
मामले में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने जहां एक आरोपी को राहत दी, वहीं गुरसेवक सिंह की अर्जी को खारिज कर दिया। इतना ही नहीं, कोर्ट ने पंजाब के डीजीपी से यह भी पूछा कि चार साल में आरोपपत्र क्यों दाखिल नहीं किया गया और आरोपी को अब तक गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया। सुप्रीम कोर्ट ने इस रवैये को लेकर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा, 'या तो हाईकोर्ट को अग्रिम जमानत मंजूर करनी चाहिए थी या फिर याचिका को पूरी तरह खारिज करना चाहिए था। लेकिन यहां हाईकोर्ट ने एक आरोपी को जमानत दे दी और दूसरे को मना कर दिया, जबकि उस पर रिश्वत लेने का सीधा आरोप भी नहीं था। यह बहुत ही असामान्य है।'

सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी
जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने कहा कि हाईकोर्ट का आदेश बहुत संक्षिप्त और असामान्य था। जस्टिस पारदीवाला ने यह भी सवाल उठाया कि जब चार साल तक आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया गया, तो हाईकोर्ट ने यह पूछताछ क्यों की कि उसे अब तक क्यों नहीं पकड़ा गया। उन्होंने कहा, 'यह तथ्य कि आरोपी को चार साल तक गिरफ्तार नहीं किया गया, अपने आप में अग्रिम जमानत देने का मजबूत आधार था।'

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सुप्रीम कोर्ट का फैसला
मामला अभी हाईकोर्ट में लंबित है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने यह कहते हुए इंतजार नहीं किया कि न्याय में देरी न हो। शीर्ष अदालत ने गुरसेवक सिंह को अग्रिम जमानत दी। आदेश में कहा गया कि अगर उन्हें गिरफ्तार किया जाता है, तो आर्थिक अपराध शाखा, लुधियाना के जांच अधिकारी की तरफ से तय शर्तों के आधार पर तुरंत जमानत पर रिहा किया जाए।

तेलंगाना भाजपा ने सीएम के खिलाफ मानहानि केस बहाल करने की मांग की, सुप्रीम कोर्ट में याचिका
तेलंगाना भाजपा ने मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी के खिलाफ मानहानि केस को बहाल करने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। हाई कोर्ट ने 1 अगस्त को यह केस खत्म कर दिया था। यह मामला 2024 लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान सीएम रेवंत रेड्डी के भाषण से जुड़ा है।

भाजपा का आरोप है कि 4 मई 2024 को रेड्डी ने पार्टी के खिलाफ भड़काऊ और मानहानिकारक बयान दिया था। कहा गया कि कांग्रेस और सीएम रेड्डी ने मिलकर यह झूठा प्रचार फैलाया कि भाजपा सत्ता में आने पर आरक्षण खत्म कर देगी। इससे पार्टी की साख को नुकसान पहुंचा। पिछले साल अगस्त में ट्रायल कोर्ट ने सीएम रेड्डी के खिलाफ मामला दर्ज करने का आदेश दिया था। इसके खिलाफ सीएम रेड्डी ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा था कि राजनीतिक भाषण को मानहानि का मामला नहीं बनाया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट में यह याचिका 8 सितंबर को मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई की पीठ के सामने सुनी जाएगी।

न्याय तक पहुंच और विवाद समाधान में मध्यस्थता अहम- जस्टिस सूर्यकांत
विशाखापट्टनम में अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता सम्मेलन में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि मध्यस्थता विवादों को सम्मान और तेजी से सुलझाने का बेहतर तरीका है। उन्होंने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए मध्यस्थता को और प्रभावी बनाया जा सकता है, बशर्ते गोपनीयता और सुरक्षा बनी रहे। इस सम्मेलन में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू भी शामिल हुए।

विंटेज रोल्स रॉयस को लेकर रिश्ते में दरार, सुप्रीम कोर्ट ने भंग की दंपति की शादी
सुप्रीम कोर्ट ने एक अलग-थलग पड़े दंपति की शादी को भंग कर दिया है, जिनके रिश्ते 1951 मॉडल की एक एंटीक रोल्स रॉयस कार को लेकर खराब हो गए थे, जिसे पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने बड़ौदा की तत्कालीन महारानी के लिए ऑर्डर किया था। न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने दोनों पक्षों के बीच हुए समझौते को दर्ज किया, जिसके अनुसार पुरुष महिला को 2.25 करोड़ रुपये का भुगतान करेगा, जिसके बाद उनके बीच सभी दावों का निपटारा होगा।

पीठ ने 29 अगस्त को कहा, 'हम याचिकाकर्ता और प्रतिवादी 1 (पति) के बीच विवाह को भंग करते हैं। अब उनके बीच कोई भी वैवाहिक या अन्य संबंध नहीं रहेगा।' समझौते के अनुसार, पति 31 अगस्त तक 1 करोड़ रुपये और शेष 1.25 करोड़ रुपये 30 नवंबर तक चुकाएगा। इस व्यवस्था के तहत, महिला अपने पति की तरफ से दिए गए उपहार अपने पास रखेगी और पति उसे और उसके परिवार को मिले सभी उपहार, जैसे सगाई की अंगूठी और अन्य कीमती सामान, एक करोड़ रुपये के डिमांड ड्राफ्ट के साथ लौटा देगा। उनके बीच सभी मामलों को रद्द करते हुए, पीठ ने इसे पूर्ण और अंतिम समझौता माना।
 
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