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SC: यौन उत्पीड़न मामलों में असंवेदनशील टिप्पणियों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा- पीड़ितों पर पड़ता है डरावना असर

Mon, 08 Dec 2025 08:34 PM IST
शिवम गर्ग न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवम गर्ग Updated Mon, 08 Dec 2025 08:34 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने यौन उत्पीड़न के मामलों में जजों की असंवेदनशील टिप्पणियों पर चिंता जताई और चेतावनी दी कि इससे पीड़ितों पर बुरा असर पड़ता है। अदालत ट्रायल और हाई कोर्ट के लिए पूरी गाइडलाइन जारी कर सकता है।

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SC Flags Chilling Effect of Insensitive Remarks in Physically Assault Cases, Plans Guidelines
सुप्रीम कोर्ट (फाइल तस्वीर) - फोटो : ANI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने यौन उत्पीड़न से जुड़े मामलों में न्यायालयों की असंवेदनशील टिप्पणियों पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने कहा कि ऐसी टिप्पणियां पीड़ितों, उनके परिवारों और पूरे समाज पर डरावना असर डालती हैं और कई बार इन्हीं के आधार पर पीड़ितों पर मामले वापस लेने का दबाव बनाया जाता है।

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मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने सोमवार को यह टिप्पणी उस समय की, जब उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट के 17 मार्च के उस आदेश पर स्वतः संज्ञान लिया जिसमें अदालत ने यौन उत्पीड़न के गंभीर कृत्यों को हल्का मानते हुए टिप्पणी की थी कि यह बलात्कार के प्रयास को साबित नहीं करता।
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ऐसी टिप्पणियां पीड़ितों को खामोश कर देती हैं- सुप्रीम कोर्ट
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि हाल के महीनों में कई हाईकोर्ट और ट्रायल कोर्ट में इस तरह की असंगत और असंवेदनशील टिप्पणियां की गई हैं। एक मामले में हाईकोर्ट ने कहा कि रात का समय होने के कारण यह आरोपी के लिए आमंत्रण जैसा था, जिस पर कोर्ट ने कड़ी आपत्ति जताई।
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एक अन्य वकील ने बताया कि एक ट्रायल कोर्ट में इन-कैमरा सुनवाई के बावजूद कई लोग मौजूद थे और पीड़िता को कथित तौर पर प्रताड़ित किया गया। इस पर CJI ने कहा कृपया सभी उदाहरण हमें दीजिए, ताकि हम व्यापक दिशानिर्देश तैयार कर सकें। ऐसी टिप्पणियां पीड़ितों को चुप करा देती हैं और न्याय प्रक्रिया पर असर डालती हैं।


हाईकोर्ट का आदेश रोका, दोबारा लगेगी सख्त धाराएं
सुप्रीम कोर्ट ने अलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश अस्थायी रूप से रोक दिया और निर्देश दिया कि ट्रायल कोर्ट बिना प्रभावित हुए धारा 376, 511 आईपीसी और पॉक्सो (POCSO) के तहत आरोप तय कर सकती है। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि यह आदेश आरोपी की दोषसिद्धि का संकेत नहीं है।

जानिए मामला क्या है?
एक महिला और उसकी 14 वर्षीय बेटी के साथ हुए कथित हमले में आरोप है कि तीन पुरुषों ने नाबालिग की छाती को दबाया, उसके पायजामे की डोरी खींची और उसे नीचे खींचने की कोशिश की। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इसे बलात्कार के प्रयास का मामला न मानते हुए केवल धारा 354B IPC लगाने के निर्देश दिए थे।

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