फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   SC favours NDA aspirant in wrong date case

मामूली गलती अभ्यर्थी के चयन में बाधा नहीं बन सकती: सुप्रीम कोर्ट

Sun, 19 Feb 2017 01:43 PM IST
राजीव सिन्हा/ अमर उजाला, दिल्ली
राजीव सिन्हा/ अमर उजाला, दिल्ली Updated Sun, 19 Feb 2017 01:43 PM IST
विज्ञापन
SC favours NDA aspirant in wrong date case
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : SELF

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जन्मतिथि या नाम लिखने में हुई मामूली गलती किसी अभ्यर्थी के चयन के लिए बाधा नहीं हो सकती है। शीर्ष अदालत ने कहा कि अनजाने या भूलवश हुई गलतियों के लिए अभ्यर्थियों को इतनी बड़ी सजा नहीं दी जा सकती।

विज्ञापन


न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल और न्यायमूर्ति यूयू ललित की पीठ ने संघ लोक सेवा अयोग (यूपीएससी) की याचिका खारिज करते हुए एक छात्र अजय कुमार मिश्रा को राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) में चयन करने का आदेश दिया है। अजय एनडीए की लिखित, साक्षात्कार और मेडिकल परीक्षा में सफल रहा था, लेकिन यूपीएससी ने उसे यह कहते हुए नियुक्ति देने से इनकार कर दिया था कि उसने आवेदन पत्र में गलत जन्मतिथि लिखी थी।
विज्ञापन


पीठ ने पाया कि  एडमिट कार्ड डाउनलोड करते समय अजय ने जन्मतिथि 11 जुलाई, 1998 दी थी, जबकि उसकी वास्तविक जन्मतिथि 10 जुलाई, 1998 है। पीठ ने पाया कि डाउनलोड करते हुए ही अजय को अपनी गलती का पता चल गया था। लिहाजा उसने संबंधित अथॉरिटी को इससे अवगत करा दिया था। इस दौरान वह लिखित परीक्षा, साक्षात्कार और मेडिकल परीक्षा में शामिल हुआ और सभी परीक्षाओं में वह सफल रहा। लेकिन उसे जन्मतिथि को सुधारने की इजाजत नहीं दी गई और यूपीएससी ने उसके चयन को रोक दिया। 

विज्ञापन
विज्ञापन

'अभ्यर्थी की गलती में कितनी गंभीरता है ये देखा जाना चाहिए'

SC favours NDA aspirant in wrong date case
supreme court

इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने भी यूपीएससी को अजय के चयन का रास्ता साफ करने का आदेश दिया था। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि जब अभ्यर्थी ने चयन की सभी प्रक्रियाओं में हिस्सा लिया और उनमें सफल रहा, ऐसे में यह देखना जरूरी है कि अभ्यर्थी की गलती में कितनी गंभीरता है।

भूलवश हुई मामूली गलतियों के आधार पर किसी को ऐसी सजा नहीं दी जा सकती। सुप्रीम कोर्ट पीठ ने अभ्यर्थी की ओर से पेश सतेंद्र त्रिपाठी और परमानंद की इस दलील को स्वीकार किया कि छोटी-छोटी गलतियों के लिए अभ्यर्थियों को चयन से नहीं रोका जा सकता।

शीर्ष अदालत ने यूपीएससी से कहा कि उसे भूलवश हुई इस तरह की गलतियों को गंभीरता से नहीं लेना चाहिए। वह भी तब जब इस गलती से अभ्यर्थियों को कोई फायदा न पहुंच रहा हो। यूपीएससी ने कहा कि अगर इस तरह की इजाजत दी गई तो याचिकाओं की बाढ़ आ जाएगी। जवाब में पीठ ने कहा कि हमें ऐसे आवेदनों पर विचार करने में कोई परेशानी नहीं है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed