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Supreme Court: मथुरा में शाही ईदगाह मस्जिद परिसर में सर्वेक्षण पर रोक नवंबर तक बढ़ी, हाईकोर्ट ने दी थी अनुमति

Fri, 09 Aug 2024 08:10 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: निर्मल कांत Updated Fri, 09 Aug 2024 08:10 PM IST
सार

Supreme Court: न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति संजय कुमार की पीठ ने उच्च न्यायालय के 14 दिसंबर, 2023 के आदेश के क्रियान्वयन पर 16 जनवरी को लगाई गई रोक को जारी रखने का आदेश दिया। 

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SC extends stay till Nov on court-monitored survey of Shahi Idgah mosque complex in Mathura
सुप्रीम कोर्ट (फाइल) - फोटो : एएनआई

विस्तार

सर्वोच्च न्यायालय ने शुक्रवार को इलाहाबाद उच्च न्यायालय के एक आदेश के क्रियान्वयन पर रोक नवंबर तक बढ़ा दी। उच्च न्यायालय ने मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि मंदिर से सटे शादी ईदगाह मस्जिद परिसर की अदालत की निगरानी में सर्वेक्षण की अनुमति दी थी। 

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न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति संजय कुमार की पीठ ने उच्च न्यायालय के 14 दिसंबर, 2023 के आदेश के क्रियान्वयन पर 16 जनवरी को लगाई गई रोक को जारी रखने का आदेश दिया। 
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हिंदू पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में क्या कहा
हिंदू पक्ष का दावा है कि मस्जिद परिसर में ऐसे संकेत हैं, जो बताते हैं कि कभी उस स्थान पर एक मंदिर था। सुनवाई के दौरान हिंदू पक्षकारों की ओर से वकील विष्णु शंकर जैन पेश हुए। उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय के पिछले साल 14 दिसंबर के आदेश के खिलाफ शादी ईदगाह प्रबंधन ट्रस्ट की समिति की अपील और संबंधित आदेश निरर्थक हो गए हैं। उन्होंने कहा, ये सभी याचिकाएं निरर्थक हो गई हैं,  क्योंकि उच्च न्यायालय ने एक अगस्त को अपना आदेश दिया है। 
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उच्च न्यायालय ने खारिज की थी मुस्लिम पक्षकारों की याचिका
जैन ने उच्च न्यायालय के एक अगस्त के आदेश का जिक्र किया, जिसके तहत उसने मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद से जुड़े 18 मामलों की विचारणीयता को चुनौती देने वाली मुस्लिम पक्षकारों की याचिका खारिज की और फैसला सुनाया कि मस्जिद का धार्मिक चरित्र तय करने की जरूरत है। 




अदालत ने मुस्लिम पक्षी इस दलील को खारिज कर दिया था कि कृष्ण जन्मभूमि मंदिर और उसके नजदीक मस्जिद के विवाद से संबंधित हिंदू पक्षकारों की ओर से दायर मुकदमे 1991 के उपासना स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम का उल्लंघन करते हैं। इसलिए वे सुनवाई के योग्य नहीं हैं। 1991 का अधिनियम किसी भी धर्मस्थल के धार्मिक चरित्र को देश की आजादी के दिन से बदलने पर रोक लगाता है। इसने केवल  राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद को अपने दायरे से छूट दी। 

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