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Witness Protection: योजना लागू नहीं होने पर SC चिंतित; कहा- सत्ता में बैठे लोगों के इशारे पर गवाहों को धमकी...
Fri, 20 Sep 2024 07:01 PM IST
श्वेता महतो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: श्वेता महतो
Updated Fri, 20 Sep 2024 07:01 PM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस बेला एम त्रिवेदी और सतीश चंद्र शर्मा की खंडपीठ ने कहा कि गवाह अदालत को सही निष्कर्ष पर पहुंचने में मदद करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अदालत ने आपराधिक मुकदमों में गवाह के संरक्षण का जिक्र करते हुए कहा कि गवाह संरक्षण योजना के प्रभावी कार्यान्वयन की कमी चिंताजनक है।
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Supreme Court
- फोटो : ANI
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट गवाह संरक्षण योजना के प्रभावी कार्यान्वयन की कमी पर चिंता व्यक्त की है। साल 2018 की इस योजना पर शीर्ष अदालत में दो जजों की बेंच ने टिप्पणी की। अदालत ने रेखांकित किया कि भारत में गवाहों की स्थिति बहुत दयनीय है।
सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस बेला एम त्रिवेदी और सतीश चंद्र शर्मा की खंडपीठ ने कहा कि गवाह अदालत को सही निष्कर्ष पर पहुंचने में मदद करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अदालत ने आपराधिक मुकदमों में गवाह के संरक्षण का जिक्र करते हुए कहा कि गवाह संरक्षण योजना के प्रभावी कार्यान्वयन की कमी चिंताजनक है।
शीर्ष अदालत ने अंग्रेजी दार्शनिक और न्यायविद जेरेमी बेंथम को भी उद्धृत किया। कोर्ट ने कहा, "गवाह न्याय की आंखें और कान होते हैं। शीर्ष अदालत की खंडपीठ ने कहा, भारतीय न्याय व्यवस्था में गवाहों की स्थिति बहुत दयनीय होना चिंताजनक है। सत्ता में बैठे लोगों, उनके गुर्गों और किराए के लोगों के इशारे पर गवाहों को धमकाया जाता है। बल प्रयोग करके मजबूर किया जाता है। पैसे का लालच भी दिया जाता है, ताकि सच्चाई को दबाया जा सके और न्याय का मखौल उड़ाया जा सके।"
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सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस बेला एम त्रिवेदी और सतीश चंद्र शर्मा की खंडपीठ ने कहा कि गवाह अदालत को सही निष्कर्ष पर पहुंचने में मदद करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अदालत ने आपराधिक मुकदमों में गवाह के संरक्षण का जिक्र करते हुए कहा कि गवाह संरक्षण योजना के प्रभावी कार्यान्वयन की कमी चिंताजनक है।
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शीर्ष अदालत ने अंग्रेजी दार्शनिक और न्यायविद जेरेमी बेंथम को भी उद्धृत किया। कोर्ट ने कहा, "गवाह न्याय की आंखें और कान होते हैं। शीर्ष अदालत की खंडपीठ ने कहा, भारतीय न्याय व्यवस्था में गवाहों की स्थिति बहुत दयनीय होना चिंताजनक है। सत्ता में बैठे लोगों, उनके गुर्गों और किराए के लोगों के इशारे पर गवाहों को धमकाया जाता है। बल प्रयोग करके मजबूर किया जाता है। पैसे का लालच भी दिया जाता है, ताकि सच्चाई को दबाया जा सके और न्याय का मखौल उड़ाया जा सके।"
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