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महाराष्ट्र में 'महा विकास आघाड़ी' के खिलाफ याचिका खारिज, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- हम दखल नहीं दे सकते

Fri, 29 Nov 2019 01:58 PM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Sneha Baluni Updated Fri, 29 Nov 2019 01:58 PM IST
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SC dismissed petition filed by Pramod Pandit Joshi against post poll alliance in Maharashtra
उद्धव ठाकरे (फाइल फोटो) - फोटो : PTI

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि लोकतंत्र में किसी पार्टी को किसी के साथ गठबंधन करने से हम रोक नहीं सकते। यह कहते हुए शीर्ष अदालत ने अखिल भारतीय हिन्दू महासभा के प्रमोद पंडित जोशी की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें चुनाव परिणाम केबाद महाराष्ट्र में शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस केबने गठबंधन को असंवैधानिक करार देने की गुहार की गई थी। 

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जस्टिस एनवी रमन्ना, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस संजीव खन्ना की विशेष पीठ ने याचिकाकर्ता के वकील वरूण कुमार सिन्हा से सवाल किया कि आखिर इस तरह के मामले में सुप्रीम कोर्ट को क्यों पडना चाहिए जिसका स्वरूप पूरी तरह से राजनीति हो। पीठ के सदस्य जस्टिस भूषण ने यह भी कहा कि चुनाव पूर्व और चुनाव के बाद कौन कौन सी पार्टी किसके साथ गठबंधन करेगी, इसमें सुप्रीम कोर्ट के दखल का कोई कारण नहीं बनता।
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वहीं जस्टिस खन्ना ने कहा कि दसवीं अनुसूची में इससे संबंधित सभी चीजें पहले से ही है। साथ ही पीठ ने कहा कि राजनीतिक नैतिकता, संविधानिक नैतिकता से अलग है। 

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याचिकाकर्ता ने बताया था गठबंधन को मतदाताओं से धोखा

याचिकाकर्ता के वकील वरुण कुमार सिन्हा ने कहा कि मतदाताओं ने भाजपा-शिवसेना के गठबंधन और उनके घोषणापत्र को देखते हुए वोट दिया था। ऐसे में चुनाव परिणाम के बाद शिवसेना का विरोधी दलों से गठबंधन मतदाताओं के साथ धोखा है। 



इस पर जस्टिस रमन्ना ने सवाल पूछा, राजनीति दल अपने घोषणापत्र में कई तरह के वायदे करते हैं तो क्या हम उन्हें उन वायदों को पालन करने का निर्देश दे सकते हैं? उन्होंने याचिकाकर्ता से कहा कि कोर्ट को उन चीजों में दखल नहीं देना चाहिए जो कि न्यायिक परीक्षण के दायरे से बाहर हैं। पीठ ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही वर्ष 2005 में रामेश्वर प्रसाद मामले में चुनाव पूर्व और चुनाव के बाद बने गठबंधन के बारे में विस्तार से अपनी राय रख चुका है। 

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