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सुप्रीम कोर्ट: अबू सलेम की याचिका पर केंद्र को निर्देश, हलफनामा दायर करने का दिया आखिरी मौका

Tue, 12 Apr 2022 03:56 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amit Mandal Updated Tue, 12 Apr 2022 03:56 PM IST
सार

शीर्ष अदालत ने 2 फरवरी को सलेम द्वारा दायर एक याचिका पर केंद्र से जवाब मांगा था, जो 1993 के मुंबई सीरियल ब्लास्ट मामले में अपनी भूमिका के लिए आजीवन कारावास की सजा काट रहा है।
 

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SC directs Union home secy to file affidavit by April 18 clarifying stand on Salem's sentence
Abu Salem (file photo) - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्रीय गृह सचिव को 18 अप्रैल तक एक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया कि क्या वह तत्कालीन उप-प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी द्वारा पुर्तगाल सरकार को दिए गए आश्वासन का पालन करने जा रहा है कि गैंगस्टर अबू सलेम को दी गई अधिकतम सजा 25 वर्ष से अधिक नहीं होगी। जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस एम एम सुंदरेश की पीठ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता द्वारा यह बताए जाने के बाद कि संचार में कमी थी, केंद्र को आखिरी मौका दिया। शीर्ष अदालत ने हलफनामा दाखिल करने में देरी पर नाराजगी जताते हुए कहा कि यह उचित नहीं है। अगर आपका गृह सचिव इतना व्यस्त है तो हम उन्हें यहां बुला सकते हैं। 

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25 साल सजा की अवधि 2027 में समाप्त हो रही है
पीठ ने अपने आदेश में कहा, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि उनकी ओर से कुछ संचार में कुछ कमी रही और केंद्रीय गृह सचिव का हलफनामा 18 अप्रैल, 2022 को या उससे पहले दायर किया जाएगा। सुनवाई के दौरान मेहता ने बुधवार तक हलफनामा दाखिल करने पर दूसरे पक्ष के वकील के बयान पर आपत्ति जताई। एसजी ने कहा कि 25 साल की अवधि 2027 में समाप्त हो रही है और अगर छूट नहीं दी जाती है तो यह 2030 में समाप्त होगी। मेहता ने कहा कि वह (दूसरे पक्ष के वकील) अदालत को निर्देशित नहीं कर सकते।
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शीर्ष अदालत ने कहा कि अदालत की समय सारिणी का सम्मान किया जाना चाहिए। कृपया उन्हें सलाह दें। हम इस व्यक्तिगत मामले से चिंतित नहीं हैं। हम प्रभाव को लेकर चिंतित हैं। कृपया देखें कि अन्य मामलों में आपकी प्रक्रिया बाधित नहीं होनी चाहिए। मामला 21 अप्रैल को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है। शीर्ष अदालत ने पहले केंद्र से इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करने को कहा था। अदालत ने कहा था कि अगली बार जब देश किसी भगोड़े को वापस लाना चाहेगा, तो भारत सरकार द्वारा दिखाई गई प्रतिबद्धता का व्यापक प्रभाव पड़ेगा।
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शीर्ष अदालत ने कहा था कि वह केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दायर हलफनामे से संतुष्ट नहीं है, जिसमें कहा गया था कि 1993 के मुंबई सीरियल के एक दोषी सलेम के प्रत्यर्पण के दौरान भारत द्वारा पुर्तगाल को अधिकतम सजा पर दिया गया आश्वासन भारतीय अदालतों पर बाध्यकारी नहीं है। शीर्ष अदालत ने 2 फरवरी को सलेम द्वारा दायर एक याचिका पर केंद्र से जवाब मांगा था, जो 1993 के मुंबई सीरियल ब्लास्ट मामले में अपनी भूमिका के लिए आजीवन कारावास की सजा काट रहा है। इसमें कहा गया था कि भारत और पुर्तगाल के बीच प्रत्यर्पण संधि की शर्तों के अनुसार उसकी सजा को 25 साल से अधिक नहीं बढ़ाया जा सकता है। अदालत ने सलेम की याचिका पर जवाब देने के लिए केंद्र को चार सप्ताह का समय दिया था।  

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